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अयोध्या के साधु-संतों ने कहा- अंकोरवाट की तर्ज पर दुनिया का सबसे भव्य और विशाल राम मंदिर बने

Dhanbad News - तस्वीर हनुमान गढ़ी मंदिर के पास की है। यहां रविवार को दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कनक भवन और अन्य प्रमुख...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:31 AM IST
Dhanbad News - the sages of ayodhya said build the world39s grandest and largest ram temple on the lines of ankorwat
तस्वीर हनुमान गढ़ी मंदिर के पास की है। यहां रविवार को दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कनक भवन और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी आम दिनों की तरह भजन-कीर्तन होता रहा। मंगलवार को शहर में पूर्णिमा स्नान और मेला है। इसमें लाखों श्रद्धालु आएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के फैसले का आकलन पेश किया, इसमें 533 सबूतों और 88 गवाहों के अध्ययन ने मदद की

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल पर मिले शिलालेख का अनुवाद भी करवाया

पवन कुमार | नई दिल्ली

अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने फैसले से पहले 88 गवाहों और 533 सबूतों का गहन अध्ययन बेहद बारीकी से किया। इस अध्ययन को सुप्रीम कोर्ट ने ‘ए बर्ड आई व्यू’ नाम दिया है। इसका फैसले के एक पैराग्राफ में बकायदा नाम भी दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल का फैसला इन्हीं दस्तावेजों पर आधारित था। इस विवाद में शामिल पक्षकारों ने कोर्ट के समक्ष 533 सबूतों को रखा था। इन सबूतों में प्राचीन ग्रंथ, कई भाषाओं में प्राचीन धार्मिक संदर्भ, गजेटियर रिपोर्ट, एएसआई की रिपोर्ट, विवादित स्थल पर मिले शिलालेख का अनुवाद इत्यादि शामिल थे।

रामलला विराजमान के मुकदमे में बचाव पक्ष ने 61 सबूत पेश किए

वादी द्वारा पेश सबूत

पक्षकार कुल सबूत

गोपाल सिंह विशारद 34

निर्मोही अखाड़ा 21

सुन्नी वक्फ बोर्ड 128

रामलला विराजमान 132

सबूतों में क्या-क्या था






धनबाद, सोमवार, 11 नवंबर, 2019

धनबाद, सोमवार, 11 नवंबर, 2019

सुप्रीम कोर्ट में किस पक्ष ने कितने गवाह पेश किए

69 साल पुरानी रिपोर्ट को कोर्ट ने बनाया फैसले का हिस्सा

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या फैसले में कमिश्नर की उस रिपोर्ट को जगह दी है, जिसकी वजह से हिंदुओं को दोबारा मूल जगह पर पूजा-पाठ की अनुमति मिली। दरअसल, 1949 में मुसलमानाें को ही नमाज पढ़ने से नहीं रोका गया था, बल्कि हिंदुओं की भी पूजा-पाठ बंद करवा दी गई थी। जब गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में विवादित जगह पर पूजा-पाठ करने व मूर्तियों को न हटाने की मांग की, तो फैजाबाद कोर्ट ने एक कमिश्नर नियुक्त किया था। उस वक्त कोर्ट कमिश्नर ने हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों की मौजूदगी में विवादित स्थल की एक रिपोर्ट बनाई थी। इसी आधार पर कोर्ट को विवाद को समझने में मदद मिली।

कहां-कैसा है अंकोरवाट

कंबोडिया में 162 हेक्टेयर में बना है विष्णु का मंदिर

अंकोरवाट कंबोडिया के अंकोर में है। भगवान विष्णु का यह मंदिर 162.6 हेक्टेयर में बनाया गया है। इसका निर्माण सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय(1112-53ई.) के शासनकाल में हुआ था। मीकांग नदी के किनारे स्थित यह मंदिर आज भी संसार का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। सम्मान के प्रतीक इस मंदिर को 1983 से कंबोडिया के राष्ट्रध्वज में भी स्थान दिया गया है। यह मंदिर मेरु पर्वत का भी प्रतीक है। यह मंदिर यूनेस्को के विश्व धरोहरों की सूची में शामिल है।

तस्वीर अयोध्या के सरयू तट की है। यहां सुबह लोगों ने पहुंचकर स्नान किया। शहर में दिन में शांति पूर्वक बारावफात जुलूस निकला। शाम को एक हजार से ज्यादा लोग सरयू आरती में हिस्सा लिया। फोटो- ताराचंद गवारिया

अयोध्या में जनजीवन सामान्य, कल पूर्णिमा स्नान के लिए तैयारी

सबकी आंखों में बसे भय को मैंने क्षण भर में उम्मीद की चमक में बदल दिया

मैं अयोध्या हूं। मैं हूं प्रभु राम की अयोध्या। मुझमें रचे-बसे हैं सबके अपने-अपने राम। मुझमें हैं सबकी अपनी-अपनी आस्थाएं। मुझमें हैं सबकी अपनी-अपनी भावनाएं। विविध परंपराओं का संगम हूं मैं। सामाजिक सरोकारों की प्रयोग भूमि हूं मैं। मुझमें चमकती है, दमकती है भारतीय संस्कृति। यही वजह है कि मैं सबकी हूं।

सबकी तरह मैं भी वर्षों से उम्मीद के कई दीपक जलाए बैठी थी। न्याय का दरवाजा हो या फिर सत्ता की चौखट। मुझे लेकर जब कोई वहां पहुंचता था, तो मैं चौकन्नी हो जाती थी। संयम के साथ मैं सच को सच होते देखना चाहती थी, लेकिन उस सच के साथ खिलवाड़ नहीं होने देना चाहती थी, जो भारत को भारत बनाता है। हर बार की तरह इस बार भी मैं सतर्क थी। मुझसे कहीं ज्यादा मुझे अपने भीतर जीने वाले लोग चौकन्ने थे। सरकार को लगा कि मैं बिखरूंगी-बिफरूंगी। पर... मैं अयोध्या हूं। मैं रमी रही अपने राम के संग। अपनी सरयू के संग बहती रही। अपने भीतर बहने वाली सद्भावना और सौहार्द की बयार के संग झूमती रही। सुबह का तनाव, शाम होते-होते कब उत्सव में बदल गया, कोई समझ ही न सका। सब हक्के-बक्के रह गए। सबकी आंखों में बसे भय को मैंने क्षण भर में उम्मीद की चमक में बदल दिया। सच तो यह है कि घट-घट में राम को मैं साकार करती रही। सब एक-दूसरे के साथ मिलकर-बैठकर आस्था और भावनाओं की जीत की बधाई बांटते रहे। हारा कोई नहीं, सब जीत गए। यह इसलिए कि सबके अहसास में मैं हूं। मैं हार-जीत से परे हूं।

कल जिसने भी मुझे देखा, हजारों दीपकों के साथ मुस्कराते और जगमगाते देखा। दुनिया ने देखा, भारतीय संस्कृति की मजबूती को, उसकी संबल देने वाली चमक को और आगे बढ़ने का जज्बा देती दमक को। मैं देश-दुनिया को यह संदेश देने में कामयाब रही कि मैं ही अयोध्या हूं। अपने राम लला की अयोध्या। मैं यह प्रमाण देने में सफल रही कि मैं ही राम राज्य का सच्चा प्रतीक हूं। मैं ही सर्व धर्म सम्भाव, वसुधैव कुटुम्बकम की भारतीय अवधारणा को चरितार्थ करती अयोध्या हूं। मुझमें बसी है सामाजिक सरोकारों की वह दुनिया, जो प्रेम और सहकार पर टिकी है। मुझे पता है कि मैं बिखरूंगी तो हमारी परंपराएं और संस्कृति को कोई और परिभाषा खोजनी पड़ेगी। पर मुझे विश्वास है कि मुझमें रचे-बसे लोग निराश नहीं होने देंगे। इस बार पूरी दुनिया इसे मान रही है। मानना ही पड़ेगा। सच तो यह है कि मेरी ओर देखने वालों को मानना पड़ेगा कि मैं राजनीति की किसी परिभाषा का हिस्सा न हूं और न हो सकती हूं, न किसी सत्ता की अवधारणा मुझसे होकर गुजरती है। मैं हूं आस्थाओं की कद्र करने वाली अयोध्या। भावनाओं का ख्याल रखने वाली अयोध्या। मुझे जो समझ लेता है, मैं उसकी हो जाती हूं। मैं हूं ही सबकी अयोध्या।...जी हां, आप सभी की अयोध्या।

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