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घटना / अवैध कोयला खनन के दौरान चाल धंसने से तीन लोगों की मौत



मलबे से निकाला गया शव। मलबे से निकाला गया शव।
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मलबे से निकाला गया शव।मलबे से निकाला गया शव।

  • सामने पड़े थे अपनों के शव, पहचाने से किया इंकार... क्योंकि अवैध माइंस में मरने वालों की मौत भी थी अवैध 

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2018, 11:58 AM IST

धनबाद. एकबार फिर अवैध माइंस के कोयले और पत्थरों में जिंदगी दब गई। राजापुर स्थित डेको आउटसोर्सिंग में पेट के लिए कोयला निकालने गए तीन लोग जिंदा नहीं लौटे। बचाव कार्य शुरू हुआ तो लोगों की भीड़ जुट गई। इस भीड़ में वे लोग भी मौजूद थे, जिनके परिवार के सदस्य पत्थरों तले दबे पड़े थे। पेलोडर से मलबा हटता...। लोग एक टक मलबे को देखते...। अचानक पेलोडर का चालक चीखा...। पेलोडर को साइड किया गया। मलबे की ढेर में एक हाथ दिखा। पुलिस और मौजूद लोगों ने मलबे को हाथों से हटाना शुरू किया। कुछ ही देर में शरीर नजर आने लगी।

मृतक की पहचान पर परिवार वाले चुप

  1. जब बॉडी निकला तो सभी इसकी ओर बढ़े। पुलिस ने पूछा... कोई पहचानता है, इसे? भीड़ से कोई आवाज नहीं है। लफ्ज खामोश रहे, पर आंखों से बहते आंसुओं ने सबकुछ बयां कर दिया। मृतक की पहचान पर परिवार वाले चुप थे, क्योंकि अवैध माइंस में मरने वालों की मौत की भी अवैध थी। एक - एक कर लाशें निकलती रही और अपने छुप-छुप कर सिसकते रहे। पर पहचान कब तक छुपती, आखिरकार पुलिस ने मृतकों की पहचान कर ही ली। पुलिस ने घटना स्थल से पांच टोकरी, दो जोड़ा चप्पल और पानी का बोतल जब्त किया है। 

  2. तेज आवाज के साथ धंसी चाल

    घटना स्थल राजापुर परियोजना के दोबारी खाद के समीप है। उक्त स्थल पर डेको आउटसोर्सिंग कोयले का उत्पादन कर रहा है। शुक्रवार सुबह प्रत्येक दिन की तरह एक दर्जन से भी अधिक उक्त मुहाने में प्रवेश खनन करने गए थे। कहा जा रहा है कि करीब एक घंटे तक कोयले की कटाई सिर मुहाने के अंदर चली। इसी दौरान तेज आवाज के साथ सिर मुहाना बैठ गया। कई लोगों ने भाग कर जान बचायी। उन्होंने स्वयं को सुरक्षित कर अंदर फंसे लोगों को बचाने का प्रयास किया। लेकिन अधिक मलबा होने और घटना की खबर चारों तरफ फैलने के कारण लोग दबे साथियों को छोड़कर फरार हो गए। 

  3. पढ़ती थी चंदा, कोयला काट चलाती थी घर

    मृतकों की सूची में एक नाम चंदा कुमारी का भी है। उसके पिता कारू बिंद हैं। इनकी पांच पुत्री अौर एक पुत्र है। इसके पूर्व दो पुत्र की मौत चुकी है। एक की मौत ट्रक की चपेट में आने से हो गई थी। चंदा पढ़ाई के साथ-साथ घर की जिम्मेवारी भी संभालती थी। चंदा की पढ़ाई से खुश होकर विदेशी कंपनी आईएनएनके के पिंनाकी राय उसे ट्यूशन पढ़ाया करते थे। उन्हीं के सहयोग से झरिया के गुजराती स्कूल में चंदा का नामांकन हुआ था। वह सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। 

  4. रेस्क्यू के लिए ढ़ाई घंटे तक नहीं आया पेलोडर

    घटना की सूचना पर पुलिस और सीआईएसएफ के अधिकारी अवैध उत्खनन स्थल पहुंचे। उन्होंने मलबा हटाने के लिए बीसीसीएल प्रबंधन से पेलोडर की मांग की। ढ़ाई घंटे बाद भी प्रबंधन ने पेलोडर नहीं दिया। डीएसपी प्रमोद कुमार केशरी ने मानवता का हवाला देते हुए लोगों से मलबा हटाने में सहयोग मांगा। इसके बाद वहां मौजूद लोग रेस्क्यू में सहयोग देने लगे। 

  5. आउटसोर्सिंग व बीसीसीएल प्रबंधन पर दर्ज हो मामला

    कांग्रेस नेता संतोष सिंह, राजद के जिलाध्यक्ष अवधेश यादव, पूर्व पार्षद अनूप साव भी घटना स्थल पहुुुंचे। सभी ने जिला प्रशासन, सीआईएसएफ, बीसीसीएल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग प्रबंधन को घटना के लिए दोषी ठहराया। उक्त लोगों पर जिला प्रशासन से एफआईआर दर्ज करने की मांग की। 

  6. नहीं पहुंचे बीसीसीएल के अफसर

    बीसीसीएल के अधिकारी शुरू से लेकर अंत तक कहीं नजर नहीं आएं। अवैध माइंस हादसा स्थल पर न कोई बीसीसीएल का अधिकारी पहुंचा और न ही उन्होंने मामलों को लेकर कोई गंभीरता दिखायी। इसे लेकर वहां पहुंचे लोगों में आक्रोश दिखा। 

  7. बख्शे नहीं जायेंगे दोषी

    डीएसपी सिंदरी प्रमोद कुमार केशरी ने कहा कि कोयला तस्करी में शामिल लोगों का पता लगाया जा रहा है। मृतकों की पहचान हो गई है। मृ़तक के परिजनों को शव हवाले कर दिया जायेगा। मामले में जो लोग भी दोषी होंगे, बख्शे नहीं जाएंगे।

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