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खचाखच भरकर गईं बिहार व यूपी जानेवाली ट्रेनें, स्लीपर व जेनरल बोगी में अंतर नहीं दिखा

एक वर्ष पहले
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हाेली के माैके पर गांव जाने वाले लाेगाें काे ट्रेनाें में सीट पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। लाेग अपने परिवार व छाेटे-छाेटे बच्चाें काे लेकर पार्सल वैन तक में सफर करने काे मजबूर हाे गए। यात्रियाें काे सीट पाने के लिए खिड़की तक का सहारा लेना पड़ा। रविवार काे गांव जाने वाले लाेगाें का हुजूम धनबाद रेलवे प्लेटफार्म पर उमड़ पड़ा। माैर्या एक्सप्रेस से लेकर गंगा-दामाेदर अाैर गुगा-सतलज समेत बिहार व उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनाें में सवार हाेने के लिए लाेग जान जाेखिम में डालकर चढ़ने का प्रयास करते देखे गए। ट्रेन के प्लेटफार्म पर अाने के पहले से ही प्लेटफार्म के दाेनाें साइड से सवार हाेने के लिए लाेग बेचैन रहे। सामान्य श्रैणी के काेच के साथ पार्सल बाेगी में भी लाेग सवार हुए। हाेली में अपने देश जाने वाले लाेगाें की परेशानियां रविवार काे भी बढ़ी रही। धनबाद से खुलने व अाने वाली ट्रेनाें में लाेगाें काे बर्थ नहीं मिला। अारक्षित काेच से लेकर सामान्य व महिला काेच की स्थिति काफी दयनीय रही। महीनाें पहले बर्थ अारक्षित करा चुके लाेगाें के बर्थ पर अाम यात्रियाें का कब्जा रहा। हाेली में स्पेशल ट्रेन के नहीं शुरू हाेने के कारण लाेग कुछ ज्यादा ही परेशाानी रही। गंगा-दामाेदर एक्सप्रेस, गंगा सतलज एक्स्प्रेस के अलावा माैर्या, वनांचल समेत कई अन्य ट्रेनाें में यात्रियाें की भीड़ लगातार रही। 10 काे हाेलिका दहन व 10 मार्च काे हाेली है। बिहार व उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनाें में रविवार काे पांव रखने की भी जगह नहीं थी।

मौर्य एक्सप्रेस में भीड़।

होली में गांव जाने के लिए धनबाद स्टेशन पर जुटी यात्रियों की भीड़।
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