बिजली कटाैती से जलापूर्ति व्यवस्था चरमराई झरिया अौर अासपास में गहराया पेयजल संकट
डीवीसी की बिजली कटाैती का सबसे ज्यादा असर झरिया काेयलांचल में पेयजल पर पड़ रहा है। इस क्षेत्र की लगभग 10 लाख अाबादी काे गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। पानी के िलए इन क्षेत्राें में हाहाकार मचा है। फायर एरिया हाेने के कारण इन क्षेत्राें में भूगर्भ जलस्तर का पानी पीने लायक नहीं है। लाेग सप्लाई पानी निर्भर हैं। हालांकि शुक्रवार काे बिजली कटाैती में अांशिक सुधार के बाद झरिया, बनियाहीर, भागा, जामाडोबा, जीतपुर, डिगवाडीह, पाथरडीह, लोदना, जयरामपुर अादि क्षेत्राें में अांशिक जलापूर्ति हुई। चार दिनाें के बाद पेयजल संकट से थाेड़ी राहत मिली।
ट्रीटमेंट प्लांट से 3.15 मिनट पर झरिया जल मीनार भरी
झमाडा के जामाडाेबा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से 3.15 मिनट पर झरिया जल मीनार काे पानी दिया गया। एक घंटे तक जल भंडारण के बाद झरिया अाैर अासपास के क्षेत्राें में जलापूर्ति की गई। जलापूर्ति शुरु हाेते ही सार्वजनिक नलाें पर पानी के लिए अापाधापी मच गई। लाेग बाल्टी, डेक्ची लेकर नल की अाेर दाैड़े। अाधा-पाैन घंटा पानी चलने के बाद जलापूर्ति बंद हाे गई। झमाडा तकनीकी सदस्य इंद्रेश कुमार शुक्ला का कहना है कि विद्युत अापूर्ति बाधित रहने के कारण जल भंडारण सही तरीके से नहीं हाे पा रहा है। किसी तरह झरिया अाैर पुटकी क्षेत्र काे जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। प्रयास है कि सभी लाेगाें काे पीने का पानी नियमित रूप से मिले। दामोदर नदी स्थित 12 एमजीडी प्लांट में लगे 350 एचपी के तीन मोटर पंप से राॅ वाटर को जल भंडारण गृह में भेजने में 20 मिनट लगते है।
सार्वजनिक नल पर पानी भरने के लिए जुटी भीड़।