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जीवन में जितनी भी अनुभूतियां होती हंै, भक्ति की अनुभूति उनमें सर्वश्रेष्ठ है: संपूर्णानंद

एक वर्ष पहले
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आनंद मार्ग जागृति कार्मिक नगर से प्रतिनिधित्व करने धनबाद से बांग्लादेश धर्म महासम्मेलन को संबोधित करने गए सीनियर पुरोधा आचार्य संपूर्णानंद अवधूत बांग्लादेश के उत्तरी दक्षिणी छोर पर स्थित ठाकुर गांव में आयोजित आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन का आयोजन किया गया। किसी कारणवश आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत बांग्लादेश नहीं जा सके। उनके प्रतिनिधित्व के लिए वरिष्ठ पुरोधा आचार्य संपूर्णानंद अवधूत को धर्म महासम्मेलन को संबोधित करने के लिए संस्था की ओर से भेजा गया। बांग्लादेश में साधकों की संख्या काफी थी। लोग उत्साहित थे। प्रथम दिन जीवन का लक्ष्य विषय पर आचार्य संपूर्णानंद अवधूत जी ने कहा कि शास्त्रों में तो मोक्ष प्राप्ति के तीन मार्ग बताए गए हैं। ज्ञान, कर्म और भक्ति। परंतु उन्होंने कहा कि बाबा श्रीश्री आनंदमूर्ति जी ने इसे खंडन करते हुए कहा कि भक्ति पथ नहीं है, बल्कि भक्ति लक्ष्य है, जिसे हमें प्राप्त करना है। साधारणत: लोग ज्ञान और कर्म के साथ भक्ति को भी पथ या मार्ग ही मानते हैं, परंतु ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि जीवन में जितने भी अनुभूतियां होती हैं, भक्ति की अनुभूति सर्वश्रेष्ठ है। ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग के माध्यम से मनुष्य भक्ति में प्रतिष्ठित होते हैं। उन्होंने बताया कि मोक्ष की प्राप्ति में भक्ति श्रेष्ठ है। भक्ति आ जाने पर मोक्ष यूं ही प्राप्त हो जाता है। भक्त और मोक्ष में द्वंद होने पर भक्त की विजय होती है। मोक्ष यूं ही रह जाता है। वरिष्ठ पुरोधा आचार्य संपूर्णानंद अवधूत ने कहा कि परमात्मा कहते हैं की मैं भक्तों के साथ रहता हूं, जहां भक्त मेरा गुणगान करते हैं, परम पुरुष के प्रति जो प्रेम है उसे ही भक्ति कहते हैं।

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