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पढ़ाई के साथ-साथ मशरूम की खेती से अजय की बदली किस्मत

जिले के फतेहपुर प्रखंड के अंगुठिया गांव निवासी अजय कुमार पंडित की लगन और मेहनत ने उन्हें एक सफल किसान बना दिया है।...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:25 AM IST
जिले के फतेहपुर प्रखंड के अंगुठिया गांव निवासी अजय कुमार पंडित की लगन और मेहनत ने उन्हें एक सफल किसान बना दिया है। मशरूम की खेती कर आत्मनिर्भर हो चुका है। अजय वर्तमान में बीए पार्ट टू का छात्र है। उन्होंने दो वर्ष पूर्व ही इस व्यवसाय में हाथ अाजमाया और अाज 25 से 30 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रहा है। उसने बताया कि प्रतिदिन करीब 20 किलो मशरूम बेच लेता है। हालांकि यहां तक पहुंचने में उन्हें कम परेशानी नहीं झेलना पड़ी है। उसने बताया कि मैट्रिक की परीक्षा देने के बाद वह पटना गया था। वहां घर-घर दूध बांटने वाले ने बताया कि वह गौ पालन कर आज हजारों रुपए महीना कमा रहा है। उसी वक्त ठान लिया था कि नौकरी की तरफ नहीं भागना है और जीवन में सफल व्यवसायी बनना है। पटना से वापस अपने गांव फतेहपुर आया तो गौ पालन करने का इरादा बनाया। जब स्थानीय जानकारों से जब इस संबंध में बात की तो बताया कि इसमें काफी खर्च है और परेशानी अलग से है। जगह भी पर्याप्त नहीं थी। इसके बाद गौ पालन का ख्याल ही मन से निकाल दिया। कुछ लोगों ने मशरूम की खेती करने के लिए प्रेरित किया। मगर इस संबंध में अधिक जानकारी नहीं थी। बताया कि उसने कभी ट्रेनिंग नहीं लिया था। नेट के माध्यम से ही जानकारी जुटाया था। पूरी जानकारी के अभाव में बीच-बीच में काफी नुकसान भी उठाना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण लोग मशरूम से अवगत तक नहीं थे। इसलिए उपजे हुए मशरूम को कहां बेचा जाए इसका बाजार भी नहीं मिल रहा था। इसी दौरान दुमका जिला के मसलिया प्रखंड स्थित टीचर्स कॉलोनी के लोगों के संपर्क में आया। कॉलोनी में मशरूम की मांग होने लगे। वहां मशरूम बेच कर 2 से 3 सौ रुपए प्रतिदिन का कमाने लगा। इसके बाद कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने बताया कि अंगुठिया गांव के अलावा रांगामाटिया गांव मे फार्म हाउस खोल रखा है। जिसे बढ़ाकर एक एकड़ में करने की तैयारी की जा रही है। बताया कि वर्तमान में दुमका जिला के मुख्य बाजार में होलसेल रेट पर मशरूम बेच देते है, जिससे प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपए कमा रहे हैं। बताया कि उसने दुधिया मशरूम, आयस्टर मशरूम पिंक, आयस्टर यलो और आयस्टर किंग का उत्पादन किया है।इंटरनेट का सहारा लिया तथा गुगल एवं यू ट्यूब के माध्यम से इसकी खेती की तकनीक की जानकारी हासिल की। उसने बताया कि मशरूम की खेती करने की इच्छा उसमें बढ़ने लगी। इसी दौरान कृषि विभाग के एक कर्मी से उसकी मुलाकात हुई और वह उसके साथ रांची स्थित पलांडू कृषि विद्यालय ले गया।

रांची में मशरूम की खेती के बारीकियों को जाना। बीज एवं मार्केट की जानकारी ली। इसके उपरांत वहां से तीन किलो बीज लाकर अपने घर में फार्म हाउस बनाकर लगा दिया। कुछ समय तक देखभाल के बाद मशरूम का अच्छा उत्पादन हुआ। इससे काफी हिम्मत बढ़ी।

अजय।

मशरूम की खेती।