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कांडी में सड़क सहित अन्य योजनाओं‎ के निर्माण के बाद भी नहीं मिला मुआवजा

एक वर्ष पहले
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कांडी प्रखंड क्षेत्र में सभी सड़कों का निर्माण दूसरे की जमीन पर कराया गया है। जिसकी जमीन है उससे निर्माण की बावत कभी किसी ने पूछा तक नहीं। इस दौरान कुल मिलाकर सैकड़ों एकड़ जमीन पर जबरन दखल जमा लिया गया। इससे इलाके में खुशी और गम दोनों देखी जा रही है। एक तरफ सड़क बनने की खुशी है तो दूसरी तरफ भूमि अर्जन की प्रक्रिया पूरी किए बिना बड़े पैमाने पर कीमती रैयती जमीन में सड़क बनाए जाने का गम भी है। यह इस प्रखंड क्षेत्र की पुरानी पीड़ा है। यहां बड़ी छोटी सभी सड़कों व अन्य सरकारी योजनाओं‎ का निर्माण बिना जमीन का अर्जन किए करा दिया जाता है। निर्माण कार्य से प्रत्यक्ष‎ व परोक्ष रुप से जुड़े तमाम सरकारी, गैर सरकारी व निजी लोग तो मालामाल हो जाते हैं लेकिन कई डिसमिल से लेकर कई एकड़ तक जमीन गंवानेवाला किसान कंगाल हो जाता है। हाल के वर्षों में पथ निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, प्रखंड व पंचायत से दर्जनों सड़कों का निर्माण कराया गया है। लेकिन निर्माण से पहले भू अर्जन की प्रक्रिया किसी योजना में पूरी नहीं की गई।

कोर्ट जाएंगे ग्रामीण

बड़े पैमाने पर जमीन गंवा चुके किसानों ने कहा कि इस गंभीर समस्या को लेकर सांसद, विधायक से कई बार लिखित फरियाद की गई। लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। अब मरता क्या नहीं करता कि तर्ज पर वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। लेकिन इससे पहले वे जल्द ही हाई कोर्ट में मामला दर्ज कराकर मुआवजा भुगतान की गुहार लगाएंगे।

किन गावों में हो रहा निर्माण : पथ निर्माण विभाग द्वारा यहां सबसे नई सड़क - खरसोता भाया सतबहिनी से कशनप रोड में खरसोता, पखनाहा, कोदवड़िया, गोसांग, गरदाहा, खुटहेरिया, तेलिया निजामत, डेमा, सोनपुरवा, महुली, पतिला, जमुआं, बलियारी, सोनपुरा, बरवाडीह, ढेलकाडीह, गाड़ा कला, नारायण पुर, बनकट व कसनप आदि गावों की जमीन पर निर्माण कराया गया है। इससे पूर्व मझिआंव - मोरबे - सुंडीपुर सड़क में भंडरिया, सोहगाड़ा, राणाडीह, मोखापी, कोरगाईं, जयनगरा, भुड़वा, खरौंधा, कशनप, बनकट व सुंडीपुर की जमीन में निर्माण हुआ है। वहीं मझिआंव - लमारी - कांडी रोड बनाने में इस प्रखंड के घोड़दाग, हरिगांवा, पीपरडीह, लमारी कला, लमारी खुर्द, राजा घटहुआं, ओलमा व कांडी की जमीन पर सड़क का निर्माण पांच छह वर्ष पहले ही कराया जा चुका है। जबकि अन्य सभी गावों की निजी जमीन पर सड़क सहित कई प्रकार के सरकारी निर्माण कराए गए हैं।


निर्माण योजना में इनकी गई है जमीन

पथ निर्माण विभाग द्वारा हाल में बनी खरसोता से कसनप सड़क में शकूर मियां, फकीर मियां, रामध्यान राम, ललित लाल, मोती लाल, विनोद लाल, किशोर लाल, सरोज लाल, मुन्ना लाल, अनुज लाल, जयकिशुन राम, राम किशुन राम, श्रीराम, रामलाल, अखिलेश राम, कमलेश राम, आस मोहम्मद अंसारी, सूर्यदेव राम, मानदेव राम, चंद्रदेव राम, इंद्रजीत मिस्त्री, मुखदेव यादव, अमिकर यादव, मुंद्रिका यादव, अलख निरंजन चौबे, श्याम सुंदर शर्मा, राम नरेश साव, जनेश्वर चौधरी, सुरेश पांडेय, नरेश पांडेय, पहलवान पांडेय, बबन राम, रामनाथ राम, बिनोद राम, महंत महानंद पुरी, अमृत रजवार, रमेश तिवारी, गोरख नाथ सिंह, जगन्नाथ लाल, राम स्वारथ राम, सुखनाथ चौहान, भुवनेश्वर मिस्त्री, स्व इंद्रदेव ठाकुर, सूर्यदेव राम, नथुनी राम, गोरख भारती, डोमन सिंह, रामजी तांतो, बीडी सिंह, प्रभू साव, ठाकुर साव, नंदू यादव, शंकर यादव, शिवनाथ साव, शिवनाथ राम, नारायण मिस्त्री, दिलीप राम, कुंडल साव आदि सैकड़ों लोगों की रैयती जमीन में बिना कहे पूछे सड़क बना दी गई है। जिसका अभी तक भू अर्जन भी नहीं किया गया है। जमीन मालिक किसानों को मुआवजा के रुप में एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई। और अधिकांश जमीन में सड़क बनाकर उसपर कब्जा जमा लिया गया।

क्या है प्रावधान : विभागीय सूत्रों के अनुसार सड़क या किसी सरकारी योजना का गैर सरकारी व निजी भूमि में निर्माण से पूर्व भूमि अर्जन किया जाना आवश्यक है। नए भू अर्जन कानून में योजना पारित होने की स्थिति में पूरे ग्रामीणों की आम सभा बुलाकर सोशल इम्पैक्ट स्टडी का प्रावधान है। इसके बाद वांछित भूमि के खाता, प्लॉट व रकबा आदि के हिसाब से प्रभावित व्यक्ति को बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाता है। इस बीच पेड़ पौधा, फसल, मकान व अन्य संपत्ति का मूल्यांकन कर मुआवजा दिए जाने का नियम है। संबंधित रैयत से जमीन लेकर मुआवजा भुगतान कर दिए जाने के बाद उनसे सहमति पत्र लेकर योजना के अभिलेख में लगाने का नियम है। लेकिन योजना के प्रस्ताव से पूर्ण होने तक उक्त नियम का कहीं भी अनुपालन नहीं किया गया है।

बगैर भूमि अर्जन किए बना दी गई सड़क।
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