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आसमानी आफत से फसलें तबाह

एक वर्ष पहले
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फिर आसमान से बरसने लगी आफत। अब खेतों में ऐसा कुछ भी नहीं बचा जिसे देखकर किसानों को मिलती राहत। अब तो रात दिन बरसते बादलों के साथ किसानों की आंखें बरस रही हैं। क्योंकि खून पसीने से कमाई उनकी सारी की सारी फसल आसमानी आफत की भेंट चढ़ गई। कई महीनों से बार बार बादल, बरसात, आंधी, तूफान व ओलावृष्टि हो रही है। जिससे फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। दिसंबर महीने में हुई भारी बरसात के पानी में लाखों रुपए का धान का पांजा व बोझा डूबकर बर्बाद हो गया था। वहीं बरसाती मौसम के कारण आलू में बड़े पैमाने पर झुलसा रोग लगने व भारी वर्षा के बाद आलू की फसल डूब जाने के कारण लाखों लाख का आलू पूरी तरह नष्ट हो गया। इधर महीनों से बरसाती मौसम किया है। बताते चल कि दशहरा के बाद कभी आठ दिन के लिए भी लगातार तीन दिन खुला धूप नहीं निकला। गेहूं, जौ, चना, अरहर, मसूर, खेसारी, सरसों, तीसी, टमाटर, नेनुआ, करैला आदि की पूरी फसल तबाह हो गई। महाजनों से भारी ब्याज पर कर्ज लेकर लगाई गई भदई, खरीफ व रबी तीनों फसल तबाह हो गई।

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