किसी आज्ञा का पालन तब तक संभव नहीं जब तक स्वयं के हृदय में किसी के सम्मान की भावना न हो : विश्वक सेनाचार्य

Garhwa News - जिला मुख्यालय से सटे जुड़वनियां शिव मंदिर परिसर में आयोजित रूद्र महायज्ञ के उपलक्ष्य में चल रहे राम कथा में...

Feb 27, 2020, 06:46 AM IST

जिला मुख्यालय से सटे जुड़वनियां शिव मंदिर परिसर में आयोजित रूद्र महायज्ञ के उपलक्ष्य में चल रहे राम कथा में स्वामी विश्वक सेनाचार्य के द्वारा राम कथा प्रस्तुत की गई। इस मौके पर उन्होंने प्रवचन करते हुए कहा कि इस कली रूपी समुद्र से पार लगाने की नौका है। रामकथा इसके सात कांड रूपी जहाज है। जो मनुष्य को इस भव सागर से पार कराती है। उन्होंने राम वनवास के प्रसंग में कहा कि श्री राम ने लोक में एक आर्दश चरित्र की स्थापना हेतु अपने पिता राजा दशरथ के मना करने के बाद भी श्री राम वन गए। उन्होंने कहा कि किसी आज्ञा का पालन तब तक संभव नहीं जब तक स्वयं के हृदय में किसी के सम्मान की भावना न हो। उन्होंने कहा कि आज्ञा का पालन किया जाता है। इसलिए श्री राम भी अपने पिता दशरथ के कुछ नहीं कहने पर भी उनकी प्रण सत्य हो जाय। श्रीराम अपने सारे राजकीय ठाट-बाट छोड़कर वन गये। इसी प्रकार मनुष्यों को अपने-अपने वाह्रय वृत्तियों को नियंत्रित कर अंर्तमुखी होना ही वनवास है। यह वनवास परम कल्याणकारी एवं मंगलदायी है।

प्रवचन सुनते लोग।

X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना