25 जरूरतमंदों को खून देकर बचाई है जान
शहर के गोपालपुर शिवमंंदिर के निकट 8/10 फीट के एक्सरे दुकान में बैठे यह शख्स कोई साधारण नहीं है। इसकी तलाश कई मुल्कों केे लोग करतेे हैं। यह कोई डाॅन नहीं हैं। बल्कि लोगों की जान बचाने में भूमिका अहम होती है। शहर के राजस्टेट निवासी उमाकांत मंडल (41) एेसे ही खास नहीं बने हैं। यह विश्व के उन 400 स्वस्थ लोगों में शामिल हैं, जिसका ब्लड ग्रुप अोएच पाॅजिटिव है। यह ग्रुप साधारण नहीं बल्कि दुर्लभ है। संकल्प संस्था का दावा है कि भारत में 10 हजार पर एक व्यक्ति को इस ग्रुप का ब्लड मिलता है। वहीं यूरोप में 10 लाख लोगों में एक व्यक्ति में मिलता है। इस वजह से इनका खून काफी महत्व रखता है। ये केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों की जान बचाने के लिए गए हैं। हाल के दिनों में नेपाल के काठमांडू में टीयू टिचिंग अस्पताल में गर्भवती महिला संगीता पटेल (45) को इसी ग्रुप के खून की जरूरत थी। ये काठमांडू जाकर उसे अपना ब्लड देकर अाए हैं। उक्त महिला को टेस्ट टयूब बेबी के लिए प्रसव कराना था। मुंबई सहित कई जगहों पर रक्तदाताओं की खोज की गई पर अंत में कोलकाता की एक संस्था की अोर से घाटशिला में मिला। इस तरह वह करीब 25 बार से ज्यादा ब्लड डोनेशन कर चुुके हैं। उनके बेटा- बेटी का ब्लड ग्रुप अो पाॅजिटिव है।
1994 में पता चला था उमाकांत का ब्लड ग्रुप
उमाकांत ने बताया कि 1994 में घाटशिला में ब्लड बैंक की अोर से ब्लड डोनेशन कैंप लगाया गया था। उस कैंप में वह भी रक्त देने गया था। रक्त के परीक्षण के दौरान डाॅक्टर भी अचंभित हो गए थे। उनका ब्लड रेयर केस बताकर संग्रहित कर लिया गया। उसके बाद उसकी जांच के लिए मुंबई भेजा गया। वहां से बताया गया कि इस ग्रुप का ब्लड काफी दुर्लभ है।
1952 में हुई थी OH+ ग्रुप की खोज
कोलकाता स्वास्थ्य संकल्प के संचालक गौरव कुमार ने बताया कि इस ब्लड ग्रुप की खोज 1952 में हुई थी। मुंबई में इस पर काफी रिसर्च के बाद इस ग्रुप का नाम अोएच पाॅजिटिव रखा गया। इसे अोएच पाॅजिटिव बोम्बे भी कहा जाता है। यह संस्था एेसे लोगों की सूची बनाकर रखी है, जिनका यह ग्रुप है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को इस ग्रुप के लोगों से ब्लड डोनेशन कराया जाता है। उन्होंने बताया कि ब्लड ग्रुप बी पाॅजिटिव काॅमन है।