घाटशिला का युवक दुमका के सरकारी अावास में फंदे से लटका मिला
दुमका पुलिस लाइन में पदस्थापित आरक्षी अरुण कुमार सिंह द्वारा फांसी लगाने की खबर से मऊभंडार में शोक की लहर दौड़ गई। अरुण का परिवार कई वर्षों से मऊभंडार के बी-ब्लॉक स्थित फ्लैट संख्या-एटीएफ 56/11 में रहता आ रहा है।मूलत : अरुण बक्सर जिले के डुमरी गांव का रहने वाला था।
मृतक के दो छोटे बच्चे हैं। अरुण कुमार सिंह लंबे समय तक मऊभंडार ओपी में कार्यरत था। अरुण की आत्महत्या की खबर पर लोगों को विश्वास ही नहीं हो पा रहा था। मऊभंडार ओपी में तैनाती के दरम्यान अरुण ने क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान कायम कर ली थी। वह कभी विवादित नहीं रहा। करीब पांच वर्षों से अरुण दुमका में पोस्टेड था।
जानकारी के अनुसार, 2005 बैच का जवान अरुण कुमार सिंह 2015 से दुमका में पदस्थापित था। वह एटीएम कैश वैन में सुरक्षा कर्मी के रूप में काम करता था। बुधवार को काम पर आने के लिए सहयोगी सुरक्षाकर्मी ने फोन किया तो कोई जवाब नहीं मिला। करीब 11 बजे सहयोगी पुलिस लाइन पहुंचे और दरवाजा खटखटाया लेकिन अंदर से आवाज नहीं आने के कारण शक हुआ। बाद में जवानों की मौजूदगी में एक सुरक्षाकर्मी ने पीछे से दीवार फांदकर अंदर जाकर देखा तो कमरे का दरवाजा बंद था। धक्का देने पर खोला तो रस्सी से अरुण का शव लटक रहा था। सूचना मिलते ही एसडीपीओ पूज्य प्रकाश व पुलिस निरीक्षक संजय मालवीय मौके पर पहुंचे और छानबीन की।
एक दिन पहले परिवार को घर पहुंचाकर आया था
दुमका पुिलस लाइन के मेजर संतोष कुमार ने बताया- जवान अरुण की प|ी व दो बच्चे 10 दिन पहले घाटशिला से दुमका आए थे। आठ मार्च को अरुण परिवार को छोड़ने के लिए घर गया था। 10 मार्च की सुबह वह दुमका लौट आया था। उस दिन अरुण ने आवास पर ही होली की छुट्टी मनाई। अगले दिन उसका शव आवास पर फंदे से लटका हुआ मिला। मृतक का एक भाई रांची में रहता है। उसे दोपहर काे सूचना दे दी गई।
परिजन के इंतजार में लटका रहा शव
बुधवार सुबह पुलिस को जवान के आत्महत्या करने की जानकारी मिली। इसके बाद एसडीपीओ व नगर थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और छानबीन की। पुलिस मृतक के भाई के आने का इंतजार कर रही है। एसपी वाईएस रमेश के आग्रह पर प्रभारी उपायुक्त ने रात में ही पोस्टमार्टम कराने की अनुमति प्रदान कर दी अौर इसके लिए दंडाधिकारी भी नियुक्त कर दिया गया।
दुमका में फंदे से लटका अरुण का शव।