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केंदपाेशी: पांच युवा छह एकड़ बंजर जमीन में खेती कर बने मिसाल
चार शिक्षित भाइयों अाैर एक उनके बीटेक पास दाेस्त ने जब नाैकरी के लिए चक्कर काट थक हार गए ताे निश्चय किया कि वे अब नाैकरी देने वाले बनेंगे। फिर अाैर क्या था जब इरादे नेक अाैर उन्हे पूरे करने के लिए हल्की सरकारी सहयाेग भी मिल जाए ताे सपनाें काे पंख लगने से काैन राेक सकता है। बात हाे रही है केंदपाेशी गांव निवासी बादल टुडू अाैर उनके तीन भाई अनिल टुडू, बाबुलाल टुडू, विनय टुडू अाैर उनके दाेस्त घाटशिला निवासी बीटेक पास महेश कर्मकार की। सभी पांचाें शिक्षित युवकाें ने सरकारी नाैकरी के लिए काफी प्रयास किया। लेकिन जब उन्हे सरकारी नाैकरी नहीं मिली ताे खुद ही नाैकरी देने वाला बनने की ठान लिया। चार भाइयों ने अपने केंदपाेशी गांव में स्थित 6 एकड़ बंजर भूमि में कुशल प्रबंधन के साथ सब्जी खेती का प्राेजेक्ट प्रारंभ किया। इस कार्य में सरकार से भी उन्हे कुछ सहयाेग प्राप्त हुए है। जिससे उनके बंजर खेताें में हरियाली क्षेत्र के लिए मिशाल बनी हुई है। चाराें भाइयों अाैर उनके दाेस्त की खेती की कुशल प्रबंधन से उगाए फसल लाेकल मार्केट में खूब बिक रहे है। ज्यादा तर फसल अाॅर्गेनिक पद्धति पर उगाए जाने से मार्केट में उनकी फसल की कीमत भी अच्छी मिल रही है। खेती कार्य प्रारंभ किए जाने से गांव के 10-12 युवकाें काे खेती में स्थाई मजदूरी से राेजगार भी मिल रहा है। खेती में ड्रिप एरिगेशन अाैर अाॅर्गेनिक खाद अाैर दवा के प्रयाेग से फसल में जहरीले रसायन नहीं रहने,फसल में पाैष्टिक गुण भी काफी मात्रा में है।
महंगी बिकने वाले सब्जियों की हाे रही खेती
किसान बादल टुडू ने बताया कि उनके केंदपाेशी गांव में स्थित 6 एकड़ जमीन लंबे समय से बंजर पड़े थे। खेत में सिंचाई साधन नहीं रहने अाैर खेत में खेती कार्य नहीं हाेने से उसे खेती याेग्य बनाए जाने के लिए कुछ ज्यादा परिश्रम करना पड़ा। लेकिन सरकार द्वारा उनके प्राेजेक्ट काे साकार करने में कई अावश्यक सहयाेग प्राप्त हुए। उनके ड्रीम प्राेजेक्ट काे साकार करने में उन्हे सहुलियत हुई। खेत में बाजार में महंगे बिकने वाले करेला, खीरा, छींगा, बिंस, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, गर्मी के माैसम के टमाटर, बंदा गाेभी, भिंडी की खेती वे कर रहे है। खेती काे मल्टी पर्पज करने के लिए देशी नस्ल के समान दिखने वाले वनराज नस्ल के मुर्गी पालन भी की जा रही है।
खेती में 12 लाेगों को मिला रोजगार
मिल रही है। खेती कार्य प्रारंभ किए जाने से गांव के 10-12 युवकाें काे खेती में स्थाई मजदूरी से राेजगार भी मिल रहा है। खेती में ड्रिप एरिगेशन अाैर अाॅर्गेनिक खाद अाैर दवा के प्रयाेग से फसल में जहरीले रसायन नहीं रहने,फसल में पाैष्टिक गुण भी काफी मात्रा में है।
पांचाें शिक्षित युवकाें ने सरकारी नाैकरी के लिए काफी प्रयास किया। लेकिन जब उन्हे सरकारी नाैकरी नहीं मिली ताे खुद ही नाैकरी देने वाला बनने की ठान लिया। चार भाइयों ने अपने केंदपाेशी गांव में स्थित 6 एकड़ बंजर भूमि में कुशल प्रबंधन के साथ सब्जी खेती का प्राेजेक्ट प्रारंभ किया। इस कार्य में सरकार से भी उन्हे कुछ सहयाेग प्राप्त हुए है। जिससे उनके बंजर खेताें में हरियाली क्षेत्र के लिए मिशाल बनी हुई है। चाराें भाइयों अाैर उनके दाेस्त की खेती की कुशल प्रबंधन से उगाए फसल लाेकल मार्केट में खूब बिक रहे है। ज्यादा तर फसल अाॅर्गेनिक पद्धति पर उगाए जाने से मार्केट में उनकी फसल की कीमत भी अच्छी
सरकार से मिले सहयाेग : खेती के लिए सिंचाई में पानी की बचत के लिए 90 प्रतिशत अनुदान में ड्रीप इरिगेशन सेटअप,शत प्रतिशत अनुदान पर किट रहित चारा उत्पादन नेट हाउस, निशुल्क बर्मी कम्पाेस्ट बनाने के उपकरण, जीवा अमृत टैंक सरकार द्वारा मिले है। जबकि खेती के लिए सिंचाई का पानी प्राप्त करने के लिए निजी स्तर पर डीप बाेरिंग अाैर फार्म हाउस करीब 5 लाख रुपए खर्च किए गए।
केंदपाेशी फार्म हाउस में सब्जी की खेत।