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मांगलिक कार्य बढ़ेंगे, कृषि में उन्नति; युवाओं को रोजगार के ज्यादा अवसर

एक वर्ष पहले
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संवत्सर का नाम प्रमादी... भगवान महावीर ने लिखा- प्रमाद का अर्थ अालस्य है, जिसे त्यागना जरूरी

अागामी 25 मार्च का दिन सनातन धर्म के लोगों के लिए सर्वाधिक खास रहेगा। इस दिन वासंतिक नवरात्र व नवसंवत्सर 2077 का शुभारंभ होगा। इसका नाम प्रमादी संवत्सर रहेगा। प्रमाद के बारे में भगवान महावीर ने लिखा है कि विवेक जल्दी नहीं मिलता, इसके लिए कर्व व साधना करना होती है। प्रमाद का अर्थ अालस्य है, जिसे त्यागना अावश्यक है। नवसंवत्सर से ही चैत्र नवरात्र प्रारंभ होगा। इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि व त्रिपुष्कर जैसे शुभ योग रहेंगे। इन योगों के चलते शुभ कर्म, शक्ति की साधना-उपासना व खरीद-फरोख्त करना फलदायी रहेगा। संयोगवश अंग्रेजी नववर्ष का शुभारंभ 1 जनवरी को हुअा था, उस दिन भी बुधवार था, वासंतिक नवरात्र व नवसंवत्सर भी बुधवार को ही प्रारंभ होगा। इस कारण इस वर्ष का राजा बुध होंगे, जबकि मंत्री का पद चंद्रमा के पास होगा।

आचार्य कृष्ण ने बताया कि शास्त्रोक्त नियम व ज्योतिषी गणना के अनुसार नवसंवत्सर में ग्रहों की मंत्रिमंडलीय व्यवस्था का निर्धारण चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के वार के अनुसार होता है। इस दिन बुधवार रहने से इसके स्वामी बुध राजा व चंद्रमा मंत्री होंगे। बुध के प्रभाव से पूरे वर्ष मांगलिक कार्यों की अधिकता रहेगी, कृषि के क्षेत्र में उन्नति होगी, वहीं युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है, पर चंद्रमा से बुध की मित्रता नहीं होने से देश में कानून व्यवस्था को चुनौतियां मिलती रहेंगी।

असर... व्यापारिक और आर्थिक क्षेत्र में तेजी से होगी उन्नति

{चंद्रमा के कारण होगी पर्याप्त वर्षा-चंद्रमा के कारण वर्षा पर्याप्त मात्रा में होगी, परंतु तेज हवा व अंधड़ से नुकसान भी होगा। दूध व सफेद वस्तुओं का उत्पादन अधिक होगा, पर इनके दाम भी बढ़ते रहेंगे। सौंदर्य प्रसाधनों की बिक्री बढ़ेगी।


{सफेद व हरे रंग की वस्तुओं से होगा मुनाफा- ज्योतिषी अर्चना सरमंडल ने बताया कि नवसंवत्सर का स्थान इस बार वैश्य के घर होने से व्यापारिक व आर्थिक क्षेत्र में तेजी से उन्नति होगी और कई बड़े बदलाव अाएंगे।

विज्ञान व कला के क्षेत्र में होंगे अनुसंधान, सैन्य शक्ति भी बढ़ेगी

ग्रहों के मंत्रिमंडल में गुरु सस्येश रहेगा, जिससे कृषि व पशुपालन के क्षेत्र में सुधार होगा। स्वर्ण अाभूषण की खरीदी भी बढ़ेगी। मेघेष सूर्य होंगे, जिनका प्रभाव गेहूं, जौं, बाजरा व स्वर्ण अाभूषण पर दिखाई देगा। इन वस्तुओं के क्रय-विक्रय में तेजी अाने लगेगी, परंतु दामों में कमी नहीं अाएगी। बुध धनेश रहेगा। सरकारी खजाने में धन बढ़ेगा, विज्ञान व कला के क्षेत्र में नए अनुसंधान होंगे व सैन्य शक्ति बढ़ेगी। रसेश शनि होगा। वर्षा होगी, पर जल संचय कम ही हो पाएगा, कहीं-कहीं भारी बारिश से नुकसान होगा। काली व नीले रंग की वस्तुओं का व्यापार भी बढ़ेगा।

शुभ तिथियां... सिंघारा दूज, गणगौर तीज, विनायकी चतुर्थी रहेंगी विशेष फलदायी

कई शुभ योगों के बीच चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 25 मार्च को नवसंवत्सर की शुभ बेला में होगा। 26 मार्च को सूर्योदय से अगले दिन सुबह 8.50 तक और 30 मार्च को सूर्योदय से दोपहर 1.45 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। संयोगवश 30 मार्च को अमृत सिद्धि योग सुबह 10.47 से रात 12.52 तक रहेगा। त्रिपुष्कर योग एक अप्रैल को रहेगा। इसके बाद दो अप्रैल को भी सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इन नौ दिनों के दौरान सिंघारा दूज, गणगौर तीज, विनायकी चतुर्थी जैसी शुभ तिथियां व पर्व भी रहेंगे। इनमें पूजा व साधना विशेष फलदायी रहेगी।
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