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बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट के धड़ल्ले से चल रहे चावल मिल

एक वर्ष पहले
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकारी व्यवस्था चुस्त दुरुस्त करने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद अधिकारियों के ढुलमूल रवैया के कारण सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण घाटशिला अनुमंडल में कई ऐसे चावल मिल हैं जो बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट के धड़ल्ले से चल रहे हैं। ये चावल मिल वर्षों से वातावरण को प्रदूषित करते हुए साथ ही सरकार को राजस्व का चूना लगाते हुए मिल चला रहे है। प्रदूषण विभाग द्वारा इन्हें कई बार मिल का संचालन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने अथवा बन्द करने का आदेश भी दिया है। इसके बावजूद वे बात नहीं मान रहे हैं।

भीम आर्मी की मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग के बाद चावल मिल मालिकों में हड़कंप


कई चावल मिल में प्रदूषित पानी निकासी करने की मशीन नहीं लगी है। इस कारण उनका अनुमति पत्र रिजेक्ट कर दिया गया है। बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट मिल चलाने पर मिल मालिकों पर जल्द से जल्द कार्रवाई होगी।- सुरेश पासवान, जिला के प्रदूषण विभाग के अधिकारी


बिना अनुमति इन मिलों का हो रहा संचालन

स्थान मिल का नाम कब तक थी अनुमति

धालभूमगढ़ सालासर इंडस्ट्रीज 31 मार्च 2016

श्री शंकर इंडस्ट्रीज 31 मार्च 2016

लक्ष्मी राइस मिल 31 मार्च 2017

गणेश राइस मिल 31 मार्च 2017

नूतनगढ़ सनराइज सरेल्स प्रालि 31 मार्च 2018

चाकुलिया मां शाकम्बरी उद्योग 30 जून 2019

श्री गणेश राइस मिल 22 अक्टूबर 2018

डीपी राइस मिल 22 मार्च 2018

भगवती राइस मिल 31 दिसंबर 2018

श्री महावीर इंडस्ट्री नया बाजार 15 जुलाई 2016

बैजनाथ शर्मा राइस मिल 20 जून 2016

एसजी एग्रो फूड प्रोडक्ट 31 मार्च 2019

माखनलाल पाल 16 अक्टूबर 2017

{चाकुलिया के श्री खाटू श्याम उद्योग ने 4 अप्रैल 2018 को अनुमति पत्र के लिए आवेदन दिया था, लेकिन विभाग द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया।

{ श्री राज उद्योग (दिघी) की ओर से 3 अगस्त 2019 को अनुमति के लिए आवेदन दिया गया। इसे विभाग द्वारा हेडक्वार्टर भेजा गया है।

( प्रदूषण विभाग के आंकड़ों के अनुसार)

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकारी व्यवस्था चुस्त दुरुस्त करने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद अधिकारियों के ढुलमूल रवैया के कारण सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण घाटशिला अनुमंडल में कई ऐसे चावल मिल हैं जो बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट के धड़ल्ले से चल रहे हैं। ये चावल मिल वर्षों से वातावरण को प्रदूषित करते हुए साथ ही सरकार को राजस्व का चूना लगाते हुए मिल चला रहे है। प्रदूषण विभाग द्वारा इन्हें कई बार मिल का संचालन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने अथवा बन्द करने का आदेश भी दिया है। इसके बावजूद वे बात नहीं मान रहे हैं।

जिला के भीम आर्मी के कार्यकारी अध्यक्ष सोनू कालिंदी ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को पत्र लिखकर चावल मिल पर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होेंने अारोप लगाया था कि बिना सर्टिफिकेट के चावल मिल चलाए जा रहेे हैं। इसकी जांच कर प्रदूषण फैलानेवाले मिल को बंद करने की मांग की है। इसके बाद बिना विभागीय अनुमति के चल रहे मिल के मालिकों में हड़कंप मच गया है।

कुछ मिल मालिकों ने कहा जिन चावल मिल को विभाग द्वारा बन्द करने का नोटिस दिया गया है उसी चावल मिल को सरकारी धान दिया जा रहा है। यह अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। इसमें लाखों रुपए का वारा न्यारा हो रहा है।
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