घाटशिला विस से सबर-बिरोहर को छोड़ संथाल, भूमिज, हो मुंडा, महाली समाज के प्रत्याशी चुनाव में अाजमा रहे भाग्य

Ghatsila News - घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में कई मायने में रोचक है। यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है। इसमें भी...

Dec 04, 2019, 08:47 AM IST
Ghatsila News - santhal bhumij ho munda mahali samaj candidates leaving ghatshila vis
घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में कई मायने में रोचक है। यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है। इसमें भी विविधता है। जनजातियों की कई उपजातियों के प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति में कई उपजातियां हैं। इनमें मुख्य रूप से संथाल, हो, भूमिज, मुंडा, महाली के अलावा आदिम जनजाति सबर व बिरहोर भी शामिल हैं। इस चुनाव में आदिम जनजाति सबर व बिरहोर को छोड़कर सभी जनजातियों के प्रत्याशी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में 16 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। इसमें सबसे ज्यादा 8 प्रत्याशी संथाल, 5 मुंडा व भूमिज, दो महाली समाज तथा एक हो समाज से है। इसमें मुख्य रूप से महागठबंधन प्रत्याशी झामुमो के रामदास सोरेन, भाजपा के लखन मार्डी, झाविमो से डा. सुनीता सोरेन, सीपीआई से कानाई मुर्मू, निर्दलीय प्रत्याशी सुनील मुर्मू, बहादुर सोरेन, जयपाल सोरेन, जुझार सोरेन शामिल हैं। महाली समाज से पूर्व विधायक सूर्यसिंह बेसरा, निर्दलीय प्रत्याशी आनंद हेम्ब्रम, भूमिज व मुंडा समाज से निर्दलीय प्रत्याशी युगल सिंह सरदार, एसयूसीआई समर्थित विजन सरदार, विश्वनाथ सिंह, लखीपद सिंह, डा. अमित कुमार सिंह, हो समाज से एकमात्र आजसू के प्रत्याशी डा. प्रदीप कुमार बलमुचू चुनाव लड़ रहे हैं।

एक लाख 30 हजार एसटी वोटर

इस विस में करीब एक लाख 30 हजार अनुसूचित जनजाति वोटर हैं। घाटशिला विस में इस बार करीब कुल 2 लाख 42 हजार वोटर हैं। इस एसटी वोटर में सबसे ज्यादा करीब एक लाख 5 हजार संथाल हैं। 8 हजार भूमिज-मुंडा समाज के वोटर हैं। हो समाज के करीब 5 हजार व माहली समाज व सबर बिरहोर के करीब 6 -6 हजार वोटर हैं।

एसटी सीट पर सामान्य वर्ग के वोटर की भूमिका निर्णायक

घाटशिला विधानसभा भले ही एसटी के लिए आरक्षित है। इसके बावजूद सामान्य वर्ग के वोटरों की प्रत्याशियों की हार-जीत में निर्णायक भूमिका होती है। इस वर्ग के वोटर जिस पार्टी को अपना 70 फीसदी मत देते जीत का सेहरा उनके माथे बंध जाता है। यही वजह है कि प्रदीप बलमुचू तीन तीन बार इस विधानसभा क्षेत्र के विधायक बने थे। इस वर्ग का वोट बलमुचू के हाथ से फिसलते हुए भाजपा में शिफ्ट हो गया। उसके बाद वर्ष 2014 में भाजपा को जीत मिली थी।

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