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सोहराय पर छामड़ाघुटू में ग्रामीणों ने पहले बैलों को सजाया, फिर मांदर-धमसा की थाप पर नचाया

घाटशिला के ग्रामीण इलाके में धूमधाम के साथ सोहराय पर्व मनाया जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व में लोग...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 02:35 AM IST
Ghatsila - the villagers first decorated the bullocks in chhamdaghutu on sohrai then danced on the demise of mandar dharma
घाटशिला के ग्रामीण इलाके में धूमधाम के साथ सोहराय पर्व मनाया जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व में लोग अपने घरों की साज-सज्जा करते हैं व गाय-बैल की पूजा करते हैं। बैलों के साथ खेल-नृत्य किया जाता है। ऐसा मानना है कि धान की अच्छी फसल के बाद इस पर्व को धूमधाम के साथ मनाया जाता है। डुमरिया प्रखंड के छामड़ाघुटू में धूमधाम से सोहराय पर्व मनाया गया। इस मौके पर आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण जुटे थे। बैलों को धमसा की थाप पर ग्रामीणों ने खूब नचाया। बैल को चमड़ा दिखाकर नचाया गया।

इस दौरान मेला सा दृश्य था। कार्यक्रम में घाटशिला के पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही परंपरा अब धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। खेतों में बैलों की जगह अब ट्रैक्टर ने ले ली है। जहां पूरे गांव के किसानों के पास गाय-बैल हुआ करते थे, अब कुछ ही किसानों के पास गाय बैल हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इस सोहराय पर्व के पहले दिन गोट बोंगा के अवसर पर ग्रामीण अपने अपने गाय और बैलों को इकट्ठा करते हैं और शाम में उनके आगमन से पूर्व घर के प्रवेश द्वार की साफ-सफाई कर सजाते हैं। दूसरे दिन गोड़ा बोंगा मनाया जाएगा। तीसरे दिन खूंटो बोंगा मनाया जाएगा। इस दौरान गांव के लोग बैलों के साथ नृत्य कर एक दूसरे के बीच खुशियां बांटते हैं।

वहीं, चौथे दिन गांव की महिलाएं व पुरुष टोली बनाकर एक-दूसरे के घर बांसुरी बजाकर जाते हैं। अंतिम दिन लोगों द्वारा अपने खेत की नई फसल से खिचड़ी बनाई जाती है।

जादूगोड़ा : मांदर की थाप पर नाचते-झूमते युवा।

घाटशिला : गोरू खूंंटान का खेल करते ग्रामीण।

परंपरा को जीवित रखने का प्रयास

भारत देश कृषि प्रधान देश है। आज भी ग्रामीण इलाके में किसान खेती के लिए अपने मवेशियों पर ही निर्भर हैं। डिजिटल इंडिया में गांव के आदिवासी किसान अपनी परंपरा को जीवित रखने का काम कर रहे हैं। सोहराय पर्व मनाने का मुख्य उद्देश्य गाय-बैलों को खुश करना है। ग्रामीण क्षेत्र में बैलों से ही खेती की जाती है। इसके अलावा हर वर्ष फसल अच्छी हो, इसको लेकर भी पर्व मनाया जाता है। सोहराय पर्व को मनाने के लिए एक दूसरे के घर एक सप्ताह से पूर्व से ही रिश्तेदारों का जुटान होने लगता है। बैल नृत्य इस पर्व का आकर्षण है। इसी बहाने लोग एक दूसरे से मिलते हैं और मांदर की थाप पर बैलों के साथ नृत्य करते हैं। अच्छी फसल की कामना भी भगवान से करते हैं।

बलमुचू ने ग्रामीणों को दी बधाई

घाटशिला| बांकी गांव में शनिवार शाम को गोरू खूंटान पर्व के कार्यक्रम में पूर्व सांसद डॉ प्रदीप कुमार बलमुचू, सांसद प्रतिनिधि काल्टू चक्रवर्ती, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष करुणा महतो, मोहन महंती, कन्हैया शर्मा, काल्टू महतो, लखीकांत महतो, दुर्गा मुर्मू, श्यामु टुडू, प्रकाश राय, नारायण महतो, हरमोहन महतो,दीपक हांसदा,जगदीश महतो मु़ख्य रूप से शामिल थे। कार्यक्रम में झुमूर गीत एवं संताली सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। डॉ बलमुचू ने ग्रामीणों को पर्व की बधाई दी। ग्रामीणों द्वारा गांव की विभिन्न समस्याओं से भी डॉ बलमुचू को अवगत कराया गया।

मुर्गाघुटू में सोहराय पर्व की रही धूम

जादूगोड़ा| नरवा पहाड़ स्थित मुर्गाघुटू में सोहराय पर्व की धूम रही। इधर वांदना पर्व को लेकर मुर्गाघुटू (नरवा पहाड़) में ग्रामीणों ने मांदर की थाप व बांसुरी की धुन पर नांचते-गाते घर-घर जाकर चावल, आलू एकत्रित किया व ढेगुवान परंपरा का निर्वाह किया। यहां के आदिवासी सोहराय पर्व से पूर्व वर्षों से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं।

सुपाई के बैल ने मारी बाजी

भास्कर न्यूज| चाकुलिया

चाकुलिया प्रखंड स्थित चियाबांधी गांव में शनिवार को सोहराय पर्व का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने गोरू खूंटान का खेल आयोजित किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मिशन मोदी युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष चंदन महतो उपस्थित थे। इस दौरान ग्रामीणों ने अपने बैलों को सजा-धजा कर खूंटे में बांधा और उसके साथ गोरू खूंटान खेल को खेला। जितने वाले प्रथम बैल के मालिक सुपाई सोरेन, द्वितीय बैल मालिक चुना राम मुर्मू को पुरस्कार देकर पुरस्कृत किया गया तथा तीसरे व चौथे स्थान पर रहने वाले बैलों के मालिक को सांत्वना पुरस्कार देकर पुरस्कृत किया गया। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए चंदन महतो ने कहा कि प्राचीन परंपरा के मुताबिक स्थानीय लोग गोरू खूंटान कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन से लोगों में एकता एवं सद्भावना की वृद्धि होती है। मौके पर ग्राम प्रधान बुबायी सोरेन, मनोरंजन महतो, पार्थो महतो, विक्की रुंगटा, कुंजा महतो, जोगेन महतो, देबा सोरेन आदि उपस्थित थे।

गोरू खूंटान कार्यक्रम में शामिल ग्रामीण।

गोरू खूंटान कार्यक्रम में शामिल पूर्व सांसद डॉ प्रदीप बलमुचू व अन्य।

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