हाथियों से मुक्ति पाने के लिए ग्रामीण खुद कर रहे उपाय खलिहान में धान की रखवाली के लिए पेड़ पर बनाया मचान

Ghatsila News - अनुमंडल के विभिन्न इलाके में हाथियों के अातंक से त्रस्त ग्रामीण जान बचाने तथा नुकसान से बचाव के लिए खुद जुगत...

Feb 22, 2020, 06:41 AM IST
Dumaria News - the villagers themselves are taking measures to get rid of elephants

अनुमंडल के विभिन्न इलाके में हाथियों के अातंक से त्रस्त ग्रामीण जान बचाने तथा नुकसान से बचाव के लिए खुद जुगत भिड़ा रहे हैं। कहीं पेड़ पर मचान बनाकर रात में उसी पर सो रहे हैं तो कहीं चोंगा से हाथियों की अावाज निकालकर उन्हें भगा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी सभी तरह के प्रयास करके थक चुकेे हैं। हाथी भगाने के बाद फिर से लौटकर अा जा रहे हैं। उसके बाद ग्रामीणों को निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा घर को क्षतिग्रस्त व फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। डुमरिया के बोमरो में जहां हाथियों के डर से ग्रामीण पेड़ पर मचान बनाकर रह रहे हैं, वहीं घाटशिला के बासाडेरा केे ग्रामीण चोंगा से हाथी की तरह तेज अावाज निकालकर उन्हें भगाने का प्रयास कर रहे हैं। एक सप्ताह पूर्व चाकुलिया में ही दो दिनों के अंतराल में हाथियों ने तीन लोगों की जान ले ली। उसकेे बाद वन विभाग ने बंगाल से हाथी भगाने का एक्सपर्ट बुलाकर हाथियों को भगाया। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुअा। बंगाल की एक्सपर्ट टीम वापस गई तो हाथी भी फिर से गांव में अाकर तबाही मचाने लगे। ग्रामीण अब थक हारकर हाथियों से बचने के लिए खुद उपाय कर रहे हैं। डुमरिया के केन्दुआ पंचायत के बोमरो गांव में हाथियों की दहशत इतनी है कि खलिहान में धान की रखवाली के लिए महुआ के पेड़ पर मचान बना लिया ताकि उस पर रात गुजार सकें। अगर रात में खलिहान में हाथी आ भी जाते हैं तो जान तो बचेगी। क्योंकि पेड़ इतना मजबूत है कि हाथी उसे हिला व तोड़ नहीं सकते।

हाथियों को भगाने के लिए वन विभाग सजग : रेंजर


इस संबंध में रेंजर दिनेश कुमार ने बताया कि हाथियों को भगाने के लिए वन विभाग के कर्मचारी सजग हैं। सूचना मिलने पर तुरंत टीम प्रभावित गांव की अोर रवाना हो जाती है। हाथियों को भगाने के बाद ही वापस लौटती है।

बासाडेरा में फिर से हाथियों का अातंक तेज


घाटशिला प्रखंड के बासाडेरा में फिर से हाथियों का अातंक तेज हो गया है। हाथी रात को गांव में प्रवेश करके बगान में लगी साग-सब्जी को नुकसान पहुंचा रहेे हैं। वहीं घर में रखे धान को चट कर रहे हैं। मशाल जलाने का उन पर कोई असर नहीं होता है। इस वजह से ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि अब हाथी से बचने के लिए चोंगा का सहारा लिया जाएगा। ग्रामीण रामचंद्र मुर्मू ने बताया कि एक नया प्रयोग किया गया है। उक्त प्रयोग हाथियों को भगाने में सफल हो रहा है। एक साथ दो से तीन चोंगा बजाने पर हाथी भागने लगते हैं। अब ग्रामीण समझ गए हैं कि चोंगा से हाथी की तरह चिंघाड़ने पर हाथी जंगल की अोर से तेेजी से भागते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के तमाम प्रयास विफल साबित हो रहे हैं।

क्षेत्र में धान की झड़ाई का चल रहा काम, इधर हाथियों का उत्पात

धान की पहरेदारी करने वाला ग्रामीण मेघराय मुर्मू ने बताया कि लगभग तीस बीघा खेती होने के कारण धान झाड़ने में वक्त लग जाता है। अभी धान की झड़ाई का काम चल रहा है। वहीं क्षेत्र में हाथी का उत्पात भी है। कुछ दिन पहले ही हाथी ने बगल में एक सबर का घर तोड़ दिया। इधर रात को खलिहान में रखे धान की रखवाली करनी पड़ती है। इसलिए महुआ पेड़ के ऊपर लकड़ी व पुआल से एक कुम्हा (घर) बना लिया है। शाम को ही तीर-धनुष लेकर बांस के सहारे कुम्हा पर चढ़ जाते हैं और रात गुजारते हैं। इससे धान की रखवाली भी हो जाती है और हाथी के हमले का खतरा नहीं रहता। पेड़ पर चढ़ते वक्त थोड़ी परेशानी होती है।

बंगाल की एक्सपर्ट टीम वापस गई तो हाथी भी फिर से गांव में अाकर मचाने लगे तबाही

महुअा के पेड़ में बना हुअा मचान।

घाटशिला : बासाडेरा चाैंगा की मदद से हाथी भगाते ग्रामीण।

डुमरिया : धान की झड़ाई करते ग्रामीण। बोमरो गांव में हाथी के डर से महुअा पेड़ पर मचान बना कर रहे ग्रामीण

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