कल गंगाजल से स्नान के बाद करें श्रीहरि की पूजा

Ghatsila News - साल में कुल 12 पूर्णिमा पड़ती हैं। जिसमें कार्तिक पूर्णिमा को श्रेष्ठ माना गया है। भविष्य पुराण के अनुसार मासों...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:40 AM IST
Ghatsila News - worship shrihari after bathing with ganges water tomorrow
साल में कुल 12 पूर्णिमा पड़ती हैं। जिसमें कार्तिक पूर्णिमा को श्रेष्ठ माना गया है। भविष्य पुराण के अनुसार मासों में कार्तिक माह और कार्तिक पूर्णिमा को सर्वोत्तम माना जाता है। क्योंकि ये पूरा माह भगवान विष्णु को समर्पित है। पूर्णिमा मंगलवार को पड़ रही है। कहा जाता है इस दिन पवित्र नदियों और कुंडों में स्नान करके भगवान श्री हरि का जप, तप, दान व पूजन आदि करने पर अन्य तिथियों से अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है। उत्तर भारत में इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है। क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने अत्याचारी त्रिपुरासुर का वध कर तीनों लोकों को भयमुक्त किया था। तब भगवान विष्णु ने भगवान शिव को “त्रिपुरारी” नाम दिया था। और देवताओं ने प्रसन्न होकर स्वर्ग में दीपावली मनाई थी। तब से पृथ्वी पर भी देव दीपावली मनाने की प्रथा शुरू हुई। इस दिन नदियों में घी की दीप जलाकर प्रवाहित करना सर्वथा शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे पार्वती और शिव पुत्र कुमार कार्तिकेय की देखभाल करने वाली छः कृत्तिकाएं प्रसन्न होती हैं और कष्ट को दूर करती हैं। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इस दिन पितरों की शांति के लिए उपासना भी शुभ होती है। महाभारत युद्ध के पश्चात पांडवों ने मारे गए योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए पूजन किया था।

शाम को चंद्रमा को खीर चढ़ाएं, राहु-केतु जनित दोषों का होगा शमन

कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह गंगाजल डाल कर स्नान करें। फिर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के आगे शुद्ध घी का दीपक जलाएं। कलश में गंगाजल रखें। पीले फूल, पीले फल, पीली मिठाई, पीला चंदन और तुलसी दल चढ़ाएं और विधिवत पूजन करें। “ॐ नमो नारायणा” मंत्र का यथा शक्ति जाप करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। नव ग्रहों और पितरों का ध्यान करें। सभी देवी देवताओं का ध्यान करें। विधिवत पूजन के बाद विष्णु, राम या कृष्ण मंदिर के वृद्ध ब्राह्मण को दान दें। भगवान शिव का कच्चे दूध से अभिषेक कर पूजन-अर्चन करें। शाम को नदी या तालाब में देशी घी का दीप प्रवाहित करें। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें और खीर का भोग चढ़ाएं। इस प्रकार पूजन करने से कुंडली के सूर्य, चंद्र बलवान होते हैं। राहु-केतु जनित दोषों का शमन होता है। अतः ये पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ऋचा श्रीवास्तव।

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