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जलसे के साथ 17वें उर्स मेले का समापन

एक वर्ष पहले
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हजरत अल्लामा सैयद अब्दुल मजीद शाह कादरी वारसी रह अलै (सैयद बाबा) की मजार पर चल रहे दो दिवसीय 17वां सालाना उर्स मेला शुक्रवार की देर रात जलसा के साथ समाप्त हो गया।

जलसा में हजरत अल्लामा मौलाना गुफरान रजा महाराष्ट्र ने कहा कि शिक्षा एक ऐसी चीज है जो हैवान को भी इंसान बना देती है। शिक्षा मनुष्य का सबसे बड़ा धन है। जिसे न तो कोई चुरा सकता है और न ही कोई छीन सकता है। इसकी सदारत कर रहे सज्जादानशीन सह मजीदे मल्लित ट्रस्ट के सरपरस्त पीर सैय्यद मिरान अहमद फातमी वारसी ने कहा कि महिलाओं के अंदर जितनी शिक्षा एवं दिनी तालिम होगी वह परिवार उतना ही शिक्षित व खुशहाल बनेगा। मानव जीवन के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। क्योंकि शिक्षा से ही समाज व देश का भला हो सकता है। जलसा कार्यक्रम में हजरत अल्लामा मुफ्ती मो. हुसैन अब्दुल हक्कानी दरभंगा, मोईनुल कादरी जमुई बिहार, जावेद वारसी कोलकाता सहित अन्य उल्लेमाओं और शायरों ने एक से बढ़कर एक शेरो-शायरी व गजल पेश कर सबको झूमने पर मजबूर कर दिया। मौके पर काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद थे। वहीं देर रात तक कलाकारों ने शायरी से लोगों को बांधे रखा। तालियों से लोगों ने कलाकारों का हौंसला बढ़ाया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोग।

उर्स मेले में संबोधित करते मौलाना गुरफान व मंचासीन अन्य।
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