Hindi News »Jharkhand »Giridih» विश्व शांति के लिए णमोकार पदयात्रा में जुटे लोग

विश्व शांति के लिए णमोकार पदयात्रा में जुटे लोग

भास्कर न्यूज | गिरिडीह /मधुबन जैनियों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन स्थित सन्मति साधना सदन में 408 दिनों से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:30 AM IST

विश्व शांति के लिए णमोकार पदयात्रा में जुटे लोग
भास्कर न्यूज | गिरिडीह /मधुबन

जैनियों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन स्थित सन्मति साधना सदन में 408 दिनों से अखंड णमोकार महामंत्र का समापन रविवार को हो गया। मौके पर राष्ट्रीय संत कमल मुनि कमलेश ने विचार व्यक्त करते कहा कि प्रत्येक अक्षर अपने आप में मंत्र है।

दो शब्द मिलने पर मंत्र, शक्ति का रूप धारण कर लेता है। मंत्र अतुल शक्ति का भंडार है। जिसका प्रभाव प्रत्यक्ष में पेड़-पौधों में, इंसान में और पशुओं पर भी प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिल रहा है। निरंतर जाप करने से वह सिद्ध हो जाते हैं। उपलब्धि के भंडार बन जाते हैं। कर्मों की निर्जरा के साथ-साथ परमार्थ के उत्थान में भी निमित्त बनते हैं। णमोकार महामंत्र जिसने भी जपा, जिसने भी सुना वह जाति स्मरण ज्ञान तक प्राप्त कर लेता है। मंत्रों की तरंगें असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाती हैं। विघ्न बाधाओं से ऊपर उठते हैं। अमंगल भी मंगल में परिवर्तित हो जाता है। विज्ञान ने भी वैदिक मंत्रों की शक्ति का लोहा माना है। अमेरिका आदि विदेशों में मंत्रों पर शोध हो रहे हैं। सैकड़ों चमत्कार प्रत्यक्ष आंखों से देखे हैं। आचार्य विप्रण सागर ने नया इतिहास रचा। जिनकी प्रेरणा से यह आयोजन सफल हुआ। वह भक्त भी अभिनंदन के पात्र हैं। जिन्होंने कठिन परिश्रम करके मंत्र के जाप को निरंतर गतिमान रखा। महामंत्र ही जैन समाज के सभी परंपराओं में सर्वमान्य है यही एकता का प्रतीक है।

हिंसक क्रूर आदि प्राणियों के ऊपर मंत्रों का प्रयोग करने पर उनके विचारों में परिवर्तन आया है। गायों के दूध में वृद्धि हुई है, खेती में फसल सवाया हुई है। डिप्रेशन, ब्लड प्रेशर जैसे रोगों से मुक्ति मिली है। इस कार्यक्रम में अनेक संत, माताजी ऐलक आदि पधारे। आचार्य विप्रण ने कहा कि श्वास के साथ मंत्र को जोड़ कर साधना करें शीघ्र सफलता मिलती है।

प्राकृतिक प्रकोप, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, दैविक प्रकोप पर नियंत्रण मंत्रों से ही संभव है। मंत्र साधना में यश, कीर्ति, इच्छाएं न हो। निष्काम और नि:स्वार्थ विचारों से साधना करें तो कर्मों की निर्जरा होकर आत्मा शाश्वत सुख मोक्ष को प्राप्त कर सकती है। मंत्र पूर्णाहुति पर पूरे शहर में विश्व शांति के लिए णमोकार पदयात्रा का आयोजन किया गया जिसमें सभी धर्म, जाति, संप्रदाय के लोगों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। 1008 कलश मंत्रों के द्वारा आमंत्रित करके श्रद्धालुओं को दिए गए राष्ट्र संत कमल मुनि के सम्मेद शिखर प्रवास के दौरान काफी उपलब्धियों के बाद रविवार को विदाई समारोह मनाया गया। सभी संतों ने भी इस अमर यादगार को अपने दिलों में बसाया। श्रावक बंधुओं ने एक चातुर्मास सम्मेद शिखरजी में गुजारने की पुरजोर विनती की थी। जन-जन में लोकप्रिय होकर यहां से टाटानगर जमशेदपुर के लिए सद्भाव यात्रा प्रारंभ की।

चास- बोकारो होकर करीब 15 अप्रैल तक टाटानगर पहुंचने की संभावना है। वहां पर 15 दिन तक जिन शासन की प्रभावना और आत्म साधना में लीन रहेंगे।

कौशल मुनी, घनश्याम मुनी ने बताया कि जहां भी राष्ट्र संत पधारते हैं। वहां पर स्वर्णिम पृष्ठों का निर्माण होता है। सम्मेद शिखर का आपसी समन्वय निरंतर बढ़ता रहे किसी की नजर न लगे यही मंगल कामना करते हैं। प्रशासन ने बिहार यात्रा की कमान तत्परता से भक्ति पूर्वक संभाल ली है।

मंचासीन श्वेतांबर-दिगम्बर जैन मुनी संत।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Giridih

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×