डुमरी में एक दशक पूर्व लगे वन होने लगे विरान, विभाग है मौन

Giridih News - डुमरी वन प्रक्षेत्र के अधीन क्षेत्रों में लगे जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। जंगलों को उजड़ने से बचाने में...

Dec 04, 2019, 08:41 AM IST
Dumri News - a decade ago in dumri the forest started becoming deserted the department is silent
डुमरी वन प्रक्षेत्र के अधीन क्षेत्रों में लगे जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। जंगलों को उजड़ने से बचाने में विभाग गंभीर नहीं है। एक ओर सरकार पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ों को लगाने के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च कर रही है और अभियान चलाकर इसकी रक्षा के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है। वहीं डुमरी प्रखंड में वन विभाग की लापरवाही और उदासीनता के कारण एक दशक पूर्व लगे वन उजड़ रहे हैं। ऐसे भी प्रखंड में वन अाच्छादित क्षेत्र का प्रतिशत मापदंड के अनुसार नहीं के बराबर है।

डुमरी वन प्रक्षेत्र में लगभग दस वर्ष पूर्व मनरेगा और पथ तट रोपण सह शहरी वानिकी योजना के तहत डुमरी-बेरमो पथ के किनारे खाखी, पोरदाग, घुटवाली, डुमरी-भरखर पथ पर भरखर, नावाटांड़, पिल्हुआ मोड़ सहित नारायणपुर-नुरंगो मोड़ व बहादुरपुर-गुरहा पथ के किनारे सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर अकेशिया, चकुंडी, घटनी आदि प्रजाति के हजारों वृक्ष लगाये गये थे। इतने बड़े क्षेत्र में लगे हजारों पौधों के व्यस्क हो जाने के बाद प्रखंड के वन क्षेत्र में वृद्धि होने के साथ-साथ पथों की सुंदरता भी बढ़ गई थी। विगत कुछ वर्षों से उक्त योजनाओं के तहत लगे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई होने लगी है। लगातार कट रहे पेड़ों के कारण कई क्षेत्रों में लगाए गए जंगल उजड़ गए हैं। यदि समय रहते इसपर रोक नहीं लगायी गयी तो जंगलों के अवशेष ही दिखेंगे। प्रखंड में वन अाच्छादित क्षेत्र का अनुपात मापदण्ड से कम है। प्रखंड में वन अाच्छादित क्षेत्र मात्र 4.48 प्रतिशत है। जबकि मापदंड के अनुसार किसी क्षेत्र की कुल भूमि का 33 प्रतिशत वन अाच्छादित होना चाहिए। अगर प्रखंड में जंगलों को इसी तरह उजाड़ा गया तो वन अाच्छादित क्षेत्र प्रतिशत में और कमी आ जाएगी और क्षेत्र के पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ेगा।

नावाटांड़ के समीप पेड़ों की कटाई से वीरान पड़ा जंगल।

क्या कहते हैं अधिकारी | इस संबंध में पूछे जाने पर डुमरी वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी राजीव रंजन ने कहा कि पेड़ों के काटे जाने के खिलाफ विभाग लगातार कार्रवाई कर रही है। कई मामले भी दर्ज किए गए हैं। जब उनसे उक्त स्थानों पर पेड़ काटे जाने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा, हम देखते हैं क्या मामला है। यदि जंगलों की कटाई हो रही है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

भास्कर न्यूज/डुमरी

डुमरी वन प्रक्षेत्र के अधीन क्षेत्रों में लगे जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। जंगलों को उजड़ने से बचाने में विभाग गंभीर नहीं है। एक ओर सरकार पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ों को लगाने के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च कर रही है और अभियान चलाकर इसकी रक्षा के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है। वहीं डुमरी प्रखंड में वन विभाग की लापरवाही और उदासीनता के कारण एक दशक पूर्व लगे वन उजड़ रहे हैं। ऐसे भी प्रखंड में वन अाच्छादित क्षेत्र का प्रतिशत मापदंड के अनुसार नहीं के बराबर है।

डुमरी वन प्रक्षेत्र में लगभग दस वर्ष पूर्व मनरेगा और पथ तट रोपण सह शहरी वानिकी योजना के तहत डुमरी-बेरमो पथ के किनारे खाखी, पोरदाग, घुटवाली, डुमरी-भरखर पथ पर भरखर, नावाटांड़, पिल्हुआ मोड़ सहित नारायणपुर-नुरंगो मोड़ व बहादुरपुर-गुरहा पथ के किनारे सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर अकेशिया, चकुंडी, घटनी आदि प्रजाति के हजारों वृक्ष लगाये गये थे। इतने बड़े क्षेत्र में लगे हजारों पौधों के व्यस्क हो जाने के बाद प्रखंड के वन क्षेत्र में वृद्धि होने के साथ-साथ पथों की सुंदरता भी बढ़ गई थी। विगत कुछ वर्षों से उक्त योजनाओं के तहत लगे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई होने लगी है। लगातार कट रहे पेड़ों के कारण कई क्षेत्रों में लगाए गए जंगल उजड़ गए हैं। यदि समय रहते इसपर रोक नहीं लगायी गयी तो जंगलों के अवशेष ही दिखेंगे। प्रखंड में वन अाच्छादित क्षेत्र का अनुपात मापदण्ड से कम है। प्रखंड में वन अाच्छादित क्षेत्र मात्र 4.48 प्रतिशत है। जबकि मापदंड के अनुसार किसी क्षेत्र की कुल भूमि का 33 प्रतिशत वन अाच्छादित होना चाहिए। अगर प्रखंड में जंगलों को इसी तरह उजाड़ा गया तो वन अाच्छादित क्षेत्र प्रतिशत में और कमी आ जाएगी और क्षेत्र के पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ेगा।

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