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जनता दरबार से अधिकारियों के गायब होने के मामले में सीएम ने लिया संज्ञान
{सीएम के संज्ञान के बाद अधिकारियों में मची खलबली
11 मार्च को बगोदर प्रखंड मुख्यालय स्थित विवाह भवन में जनता दरबार कार्यक्रम की महज खानापूरी पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लिया है। 12 मार्च को अखबार में छपी खबर की कतरन को गिरिडीह के युवक सोमनाथ केसरी ने ट्विटर के जरिए सीएम हेमंत सोरेन को भेज टैग किया था। परिणाम हुआ कि मुख्यमंत्री ने इस पर त्वरित संज्ञान लिया और मामला गंभीर बताते हुए राज्य के सारे उपायुक्तों को ऐसे मसले पर गंभीर होने का निर्देश जारी कर दिया है।
सीएम के संज्ञान के बाद जनता दरबार से गायब अधिकारियों में खलबली मच गई है। इस ट्विट में सिर्फ घंटे भर में करीब 1000 लोगों ने लाईक व कमेंट्स दिया। विदित हो कि उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा जनता दरबार में शरीक हुए थे। तीन पंचायतों के लिए जनता दरबार का आयोजन किया गया था। बगोदर पूर्वी समेत जरमुने पूर्वी और पश्चिम पंचायत के लोगों की फरियाद इसमें सुनी जानी थी। इस मौके पर कई स्टाल भी सजे थे। उपायुक्त 1 घंटे से अधिक समय तक जनता दरबार में रहे, लोगों की बातें सुनी। करीब 12:30 बजे उपायुक्त गिरिडीह प्रस्थान कर गए। लेकिन उपायुक्त के निकलते ही सारे अधिकारी निकल पड़े।
जनता दरबार में पहुंचे लोग अधिकारियों को ढूंढते रह गए
उपायुक्त से जनता दरबार के नियमित संचालन की मांग की। 1:16 बजे जनता दरबार के सभा मंच में सिर्फ एक ही कुर्सी लगी थी जो उपायुक्त के लिए रखी गई थी। इससे यह स्पष्ट है कि शेष अधिकारियों के लिए लगी कुर्सियां 1:16 बजे के पहले समेट ली गई थी। उपायुक्त के लिए जो कुर्सी लगी थी, मौके पर ही पड़ी थी। जनता दरबार में अधिकारियों की गैर मौजूदगी 12:30 बजे के बाद भास्कर ने देखी। लिहाजा वहां मौजूद प्रमुख उप प्रमुख समेत कई लोगों से प्रतिक्रिया ली। एक स्वर में सभी लोगों ने इस पर आपत्ति जताई, यह भी कहा कि जनता दरबार का उद्देश्य ऐसे में पूरा नहीं हो पाएगा। समाजसेवी कुंजलाल साव फरियाद लेकर पहुंचे थे, वह भी अधिकारियों को ढूंढते रह गए फिर बैरंग लौट गए। जनता दरबार में अव्यवस्था के बाबत दैनिक भास्कर में 12 मार्च को प्रमुखता के साथ खबर छपी। खबर पूरी तरह सच्चाई पर आधारित थी। जिसे गिरिडीह के युवक सोमनाथ केसरी द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अखबार का कतरन ट्वीट किया गया। ट्विटर के जरिए मुख्यमंत्री ने मामले पर संज्ञान लिया और प्रतिक्रिया व्यक्त की और राज्यभर के सभी उपायुक्त ऐसे मसले पर गंभीर होने का निर्देश दिया है।
सीएम के संज्ञान के बाद जनता दरबार से गायब अधिकारियों में खलबली मच गई है। इस ट्विट में सिर्फ घंटे भर में करीब 1000 लोगों ने लाईक व कमेंट्स दिया। विदित हो कि उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा जनता दरबार में शरीक हुए थे। तीन पंचायतों के लिए जनता दरबार का आयोजन किया गया था। बगोदर पूर्वी समेत जरमुने पूर्वी और पश्चिम पंचायत के लोगों की फरियाद इसमें सुनी जानी थी। इस मौके पर कई स्टाल भी सजे थे। उपायुक्त 1 घंटे से अधिक समय तक जनता दरबार में रहे, लोगों की बातें सुनी। करीब 12:30 बजे उपायुक्त गिरिडीह प्रस्थान कर गए। लेकिन उपायुक्त के निकलते ही सारे अधिकारी निकल पड़े।
सभा मंच पर सजी कुर्सियां पूरी की पूरी खाली हो गई। जबकि जनता दरबार में फरियाद लेकर आए फरियादी मौजूद थे और अधिकारियों को अपनी बात से रूबरू कराना चाह रहे थे। जनता दरबार से मायने आम जनों ने यह लगा रखा है कि कार्यालय अवधि अर्थात सुबह 10 बजे से 4 बजे तक अधिकारियों जनता की फरियाद सुनी जाएगी। लेकिन 11 मार्च को आयोजित जनता दरबार में 12 : 30 बजे के बाद एक भी अधिकारी व कर्मचारी मौजूद नहीं थे। लिहाजा फरियादी चक्कर काटते रहे। मौके पर मौजूद प्रखंड प्रमुख मुस्ताक अंसारी तथा उप प्रमुख सरिता साहू ने अधिकारियों के जनता दरबार से 12:30 बजे के बाद खिसक लेने पर सवाल उठाया।
शुरुआत में अधिकारियों की लगी थी भीड़
यह सवाल उठना लाजिमी है कि जनता दरबार की औपचारिकताएं पूरी होंगी, तब आखिर इसका मतलब क्या रह जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को जन समस्याओं से रूबरू होने और उसका निष्पादन के लिए जनता दरबार आयोजित करने के निर्देश दे रखे हैं। इस निमित सिलसिलेवार प्रखंड के पंचायतों में जनता दरबार का आयोजन किया जा रहा है। 11 मार्च को बगोदर विवाह भवन में आयोजित जनता दरबार में मुख्य रूप से जिले के उपायुक्त के अलावा नजारत उप समाहर्ता, बगोदर-सरिया के एसडीएम, बगोदर के सीओ बीडीओ समेत कई अधिकारी मौजूद थे। 12 : 30 बजे के बाद जब डीसी गिरिडीह के लिए प्रस्थान किए तत्पश्चात तमाम कुर्सियां खाली हो गई। सभा मंच पर एक को छोड़ शेष कुर्सियां भी गायब हो गई। यदि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले में संज्ञान लिया है तो बात तो दूर तलक जाएगी और कर्तव्यों के प्रति बेपरवाह स्थानीय अधिकारी को मुख्यमंत्री के कड़े रुख से दो चार होना होगा। इसमें कहीं से शक की गुंजाइश नहीं है। यदि मुख्यमंत्री ने इस मामले में कड़े एक्शन लिए तो सिर्फ बगोदर ही नहीं राज्य भर के बेपरवाह अधिकारी के कार्यकलापों में सुधार आएगा। जिसका लाभ आम जनों को मिलेगा। विडंबना यह है कि 11 मार्च को आयोजित जनता दरबार के सभा मंच जिस पर उपायुक्त समेत तमाम अधिकारी विराजे थे, खाली होने के बाद बीडीओ रविन्द्र कुमार से जनता दरबार की टाइमिंग इस संवाददाता ने पूछी, मगर वे बताने में असमर्थ रहे।
{घंटे भर में करीब 1000 लोगों ने किया लाइक व कमेंट्स
सीएम का ट्वीट।