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भारतीय सांख्यिकीय संस्थान की उत्पत्ति व इतिहास पर चर्चा

2 वर्ष पहले
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कार्यक्रम का उद्घाटन करते अतिथि।

सिटी रिपोर्टर | गिरिडीह

13 वें सांख्यिकी दिवस को भारतीय सांख्यिकीय संस्थान में समारोहपूर्वक मनाया। आज प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की 126 वीं जयंती है। इस अवसर पर अतिथि के रूप में भारत के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के निदेशक को आमंत्रित किया गया था। यह वर्ष भारत सरकार की योजनाओं के सतत विकास लक्ष्यों पर विशेष था। भारतीय सांख्यिकीय संस्थान के अधिकारी प्रभारी डॉ हरि चरण बेहरा ने स्वागत भाषण दिया।

उन्होंने भारतीय सांख्यिकीय संस्थान की उत्पत्ति और इतिहास के बारे में बताया। कहा कि इस अवधि के दौरान प्रो. महालानोबिस को संघर्षों का सामना करना पड़ा। अर्थव्यवस्था के विकास कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें स्वतंत्रता के बाद की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वह योजना आयोग के पहले सदस्य भी थे। जिसने देश के आद्योगिकीकरण के विकास को गति दी। मनीष आनंद, राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान गिरीडीह शाखा के डिप्टी डायरेक्टर ने दिन और जीवन के स्थायी विकास के लक्ष्यों की प्रासंगिकता के बारे में बताया है। उन्होंने सांख्यिकी का हमारे आम जीवन में महत्त्व के बारे में भी बताया। डॉ प्रदीप भट्टाचार्य, कृषि और पारिस्थितिक अनुसंधान इकाई गिरिडीह शाखा के एसोसिएट प्रोफेसर ने भारत में सांख्यिकी और विभिन्न प्रगतिशील प्रकार के बुनियादी सांख्यिकीय आंकड़ों के विकास के बारे में बताया।

कृषि व पारिस्थितिक अनुसंधान इकाई गिरिडीह शाखा के सहायक प्रोफेसर डॉ अभिषेक मुखर्जी ने कृषि के अंतःविषय दृष्टिकोण और प्रासंगिकता और आईएसआई के अन्य विकसित केंद्रों के साथ-साथ आईएसआई गिरिडीह बनाने के सपने को पूरा करने के लिए फसल में आंकड़ों के उपयोग की व्याख्या की। उत्सव कार्यक्रम के अंत में आईएसआई गिरिडीह शाखा के प्रशासनिक अधिकारी अभिषेक मंडल ने धन्यवाद व्यक्त करते हुए उपस्थित अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

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