पूर्व विधायक महेन्द्र सिंह गरीबों के थे दमदार आवाज, पुण्यतिथि आज

Giridih News - बगोदर विधानसभा क्षेत्र के भाकपा माले के पूर्व विधायक स्व. महेन्द्र सिंह गरीब-गुरुबों व मजदूर-किसानों के दमदार...

Jan 16, 2020, 07:56 AM IST
Saria News - former mla mahendra singh was a strong voice for the poor today is a death anniversary
बगोदर विधानसभा क्षेत्र के भाकपा माले के पूर्व विधायक स्व. महेन्द्र सिंह गरीब-गुरुबों व मजदूर-किसानों के दमदार आवाज थे। सरिया प्रखंड के दुर्गीधवैया में चुनाव-प्रचार के दौरान 16 जनवरी, 2005 को उनकी हत्या कर दी गयी थी। लेकिन उन्हें चाहने वाले आज भी उन्हें भूल नहीं पाये हैं। वे गरीबों और वंचितों के लिए एक उम्मीद थे। अभी भी गरीब-गुरबों में वह उम्मीद जीवित है। इसका अंदाजा उनकी पुण्यतिथि 16 जनवरी पर झारखंड के कोने-कोने से जुटने वाली भीड़ से सहज लगाया जा सकता है। जहां लोग अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि देते हुए उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लेंगे।

बताते चलें कि महेंद्र प्रसाद सिंह का जन्म बगोदर प्रखंड के एक छोटे से गांव खम्भरा में 22 फरवरी, 1954 को हुआ था। बचपन से बगावती तेवर के धनी महेंद्र सिंह 1978 में आइपीएफ नेता मोहन दत्ता के संपर्क में आये। जुल्म, अत्याचार, शोषण, पुलिसिया जुल्म के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए 1990 में पहली बार बगोदर विधानसभा से महेंद्र सिंह विधायक बने तब से लगातार तीन बार विधायक चुने गए। सड़क से सदन तक गरीबों की आवाज बन कर गूंजते रहे। उन्होंने झारखंड में एक अत्यंत कठिन व संकट ग्रस्त दौर में भी सादगी, ईमानदारी और संघर्ष का रचनात्मक माहौल गढ़ा। आज उनकी इसी परम्परा को उनके पुत्र भाकपा माले के बगोदर विस से विधायक बिनोद कुमार सिंह व उनके साथी आगे बढ़ाने की काेशिश कर रहे हैं। राज्य के ज्वलंत मुद्दों को अखंड बिहार, झारखंड विधानसभा में तर्कसंगत ढंग से उठाने के कारण कम समय में ही महेन्द्र सिंह की छवि राजनेता की बनने लगी थी, इसी दौरान चुनाव के दौरान उनकी हत्या कर दी गयी। स्व. सिंह में कवि व दार्शनिक के गुण भी विधमान थे।

यहां तक कि जन सवालों को लेकर 2003 में झारखंड विधानसभा में उनका मतभेद हुआ तो वे इस्तीफा देने से भी नहीं चुके। और उन्हें मनाने रांची से तत्कालीन विधान सभाध्यक्ष इन्दर सिंह नामधारी को आना पड़ा था। उनका हमेशा से कहना था कि में मर सकता हूं, मिट सकता हूं पर जन सवालों व जनता के हितों के साथ समझौता नहीं कर सकता और सचमुच उन्होंने मरना पसंद किया पर डरना नहीं।

इसका उदाहरण हत्या के वक्त बाइक से आये हत्यारों ने पूछा कि कौन है महेंद्र सिंह तो उन्होंने निर्भीक होकर कहा वे हैं महेंद्र सिंह और हत्यारों ने उन्हें गोलियाें से भून दिया। इस प्रकार गरीबों का हमदर्द मौत की नींद सो गया। संकल्प सभा की तैयारी में बगोदर विधानसभा के सभी गांव, बाजार, लाल झंडों और बैनरों से पट गया है। आज कार्यक्रम में पूरे जिले से हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इसको लेकर पुलिस प्रशासन ने भी पूरी तैयारी कर रखी है। ताकि विधि-व्यवस्था में कोई बाधा उत्पन्न न हो सके। वहीं पदाधिकारियों को भी अलर्ट रहने को कहा गया है।

महेंद्र सिंह की फाइल फोटो।

कैसा था महेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर

महेंद्र सिंह का राजनीतिक जीवनी पर चर्चा की जाये तो उन्होंने 1985 में जेल से विधानसभा चुनाव लड़ा हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार मिली थी। इसके बाद 1990 से 2005 तक वे लगातार तीन बार बगोदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे। 1994 में बगोदर थाना के तत्कालीन थानेदार राजवंशी सिंह की कार्यशैली से लोग परेशान थे। जिसको लेकर महेंद्र सिंह के नेतृत्व में कई दिनों तक जीटी रोड पर अनशन किया गया था। लोग घरों से आंदोलनकारियों के लिए भोजन की व्यवस्था करते थे। अंततः बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के निर्देश पर बगोदर थानेदार को हटाया गया। 9 फरवरी, 1999 को माओवादियों ने हमला कर बगोदर अंचल में कार्यरत गार्ड की राइफल लूट ली थी। घटना की सूचना मिलते ही महेंद्र सिंह ने बगोदर थाना के मेन गेट को बंद कर दिया। उन्होंने पुलिस कर्मियों को करीब छह घंटे तक थाने के बाहर नहीं निकलने दिया। गिरिडीह-हजारीबाग के एसपी, डीआईजी व अन्य पुलिसकर्मी बगोदर पहुंचे इसके बाद उनसे वार्ता कर थाना का गेट खोला गया। एक लंबे समय से पंचायत चुनाव नहीं कराया जा रहा था जिसको लेकर उन्होंने हर गांवों में मतदान के जरिये ग्रामसभा का गठन शुरू किया। इसकी शुरुआत उन्होंने बगोदर प्रखंड के बेको पंचायत के पत्थलडीहा गांव से की। सच्चे मायने में महेंद्र सिंह एक जननायक थे। विधानसभा में पझ-विपक्ष के लोग भी उनकी बातों को ध्यान से सुनते थे। आम लोगों के हित के लिए कई बार महेंद्र सिंह जेल गये। जीवन में हर लोग अपने लिये जीते हैं लेकिन यह लोगों की धारणा सही नहीं है। जीना है तो हर इंसान के सुख-दुःख का साथी बनें और उनके संघर्षों को खेत-खलिहान से लेकर विधानसभा व लोकसभा तक पहुंचाएं।

...16 जनवरी, 2005 को दुर्गीधवैया में चुनावी प्रचार के दौरान मारी गई थी गोली

बिरनी | 16 जनवरी, 2005 को महेंद्र सिंह को सरिया स्थित दुर्गीधवैया में चुनावी प्रचार के दौरान गोलियों से भून डाला था। बगोदर विधानसभा के इतिहास में वह काला दिन था। उस दिन को याद करते भाकपा माले नेता संतोष कुमार ने कहा महेंद्र सिंह चुनावी सभा कर रहे थे। सभा स्थल पर अचानक अपराधियों ने पूछा कि महेंद्र सिंह कौन है। इस पर वह खुद सामने आये और कहा कि मैं हूं महेंद्र सिंह। इसके बाद उन पर ताबड़ तोड़ गोलियों की बौछार कर दी गई थी। जिसके बाद गरीब दबे-कुचले लोगों की आवाज हमेशा के लिए काल के गाल में समा गया। कहा महेंद्र सिंह आज भी बगोदर की जनता के अरमानों में जिंदा हैं। स्वर्गीय महेंद्र सिंह मौत से कभी भी नहीं डरा। यही वजह है कि वे भाषणों में भी अक्सर कहा करते थे हम जनता से एक ही वादा कर सकते हैं। वे जेल जा सकते हैं, मारे जा सकते हैं, मगर जनता के साथ दगा-फरेब नहीं कर सकते।

हत्या के बाद एक स्वर में उठी थी विनोद सिंह को विधायक बनाने की मांग

महेंद्र सिंह की निर्मम हत्या के बाद उनके पार्थिव शरीर को बगोदर ट्रेनिंग स्कूल के मैदान में रखा गया था जहां राज्य भर के लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। चुनाव का माहौल था कि जनता में जोरदार आवाज उठी कि विनोद सिंह को बगोदर विधानसभा से उम्मीदवार बनाया जाए। अन्ततः भाकपा माले ने बगोदर विधानसभा क्षेत्र से उन्हें उम्मीदवार बनाया और उन्होंने जीत भी दर्ज की। 2014 तक विनोद सिंह विधायक रहे।

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