मुठभेड़ में मारे गए मानिकचंद के भाई ने कहा, वह बीए का छात्र था, नक्सली नहीं

Giridih News - बिहार-झारखंड बॉर्डर स्थित भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के भतुआकुरहा जंगल में सोमवार की अहले सुबह सीआरपीएफ व नक्सलियों...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:36 AM IST
Giridih News - manikchand39s brother killed in encounter said he was a student of ba not naxalite
बिहार-झारखंड बॉर्डर स्थित भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के भतुआकुरहा जंगल में सोमवार की अहले सुबह सीआरपीएफ व नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में मारे गए तीन नक्सलियों में से एक युवक मानिकचंद मुर्मू है, जो चकाई फाल्गुनी प्रसाद यादव महाविद्यालय के पार्ट वन का छात्र था। जबकि अन्य दो में से एक जमुई जिला के चरकापत्थर सोनो थाना अंतर्गत तेतरिया गांव का विजय मरांडी उर्फ संजय और दूसरा चकाई थाना क्षेत्र के बरखुटिया निवासी सुनील हांसदा उर्फ प्रभात का शव है। मारे गए तीन नक्सलियों में सिर्फ एक ही शख्स सुनील हांसदा उर्फ प्रभात है, जो नक्सली वर्दी में था और उसी के पास एके 47 हथियार भी था। सीआरपीएफ और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में मारा गया मानिकचंद मुर्मू जमुई जिला के चकाई थाना क्षेत्र अंतर्गत पोझा पंचायत के बेहरा गांव का निवासी था। उसका भाई रामलखन मुर्मू वर्तमान में चकाई प्रखंड के भाग-1 का जिला परिषद सदस्य है। ग्रामीण बताते हैं कि अपने भाई को जिला परिषद का सदस्य बनाने में मानिकचंद मुर्मू की अहम भूमिका रही थी। मानिक चंद गांव में किराना दुकान भी चलाता था, उसे प|ी व एक 4 साल का पुत्र भी है। पुलिस मुठभेड़ में उसके मारे जाने के बाद प|ी का रो-रोकर बुरा हाल है और वह अपने पति को निर्दोष बता रही है। फिलहाल झारखंड पुलिस मामले की जांच कर रही है।

इस संबंध में सीआरपीएफ एवं नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में मारे गए माणिक चांद मुर्मू के बड़े भाई चकाई भाग संख्या-1 के जिला परिषद सदस्य रामलखन मुर्मू ने बताया कि उसका छोटा भाई माणिक चांद रामनवमी मेला के दौरान देवरी थाना के भेलवाघाटी स्थित बरजोडीह स्कूल में आयोजित संथाली आर्केस्ट्रा देखने की बात कहकर 14 अप्रैल को शाम को घर से निकला था। 15 अप्रैल की सुबह वह बाइक से वापस अपने घर बेहरा आ रहा था कि सीआरपीएफ एवं नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में मारा गया। उसने बताया कि उसका भाई घर में रहकर पुलिस बहाली की तैयारी करता था। अगले महीने पुलिस बहाली की परीक्षा देकर लौटा था, जिसका रिजल्ट अभी नहीं निकला है। घर में राशन की दुकान चलाकर अपना परिवार चलाता था और पढ़ाई भी करता था। मानिकचंद मुर्मू चकाई फाल्गुनी प्रसाद यादव महाविद्यालय में पार्ट-1 का छात्र था। बताया िक उसका भाई निर्दोष था वह न तो नक्सली संगठन में कभी रहा और न ही किसी नक्सली से उसका संपर्क ही था। वहीं किसी भी थाने में उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। कारकेस्ट्रा देखकर लौटने के दौरान जिस जंगल में मुठभेड़ हो रहा था, उसी रास्ते से वह वापस घर लौट रहा था। जहां फंस गया और बगैर सोचे-समझे सीआरपीएफ जवानों ने बंदूक की गोली से उसे मार डाला। सोमवार को वाट्सअप द्वारा उसकी फोटो शाम में मिली थी, तब परिजनों को इसकी जानकारी हुई और उसके बॉडी को लाने के लिए देवरी थाना भेजा गया है।

परिजनों ने कहा, वह न तो नक्सली संगठन और किसी नक्सली के संपर्क में था

माणिकचंद।

शोकाकुल मृतक के परिजन।

दोष छिपाने का यह एक तरीका है : पुलिस

इधर देवरी पुलिस का कहना है कि यदि मानिकचंद मुर्मू नक्सली है अथवा नहीं यह तो जांच का विषय है। लेकिन यदि वह नक्सली नहीं था, तो देर रात में जंगल में हथियार व विस्फोटक के साथ क्या कर रहा था। वैसे हर नक्सली जब मारा जाता है, तो उसके परिजन यही कहकर अपना दोष छुपाने का प्रयास करते हैं। वह क्या था और क्या नहीं, सारा कुछ मुठभेड़ की घटना व वहां की स्थल ही बता रहा है।

12 अज्ञात नक्सलियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज

देवरी | भेलवाघाटी में सीआरपीएफ व गिरिडीह पुलिस द्वारा बीते सोमवार को झारखंड-बिहार के सीमाई इलाके में चलाए जा रहे छापेमारी अभियान के दौरान हुई मुठभेड़ के मामले में भेलवाघाटी थाना में कांड संख्या 13/19 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में भाकपा सिद्धू कोड़ा सहित दस से बारह अज्ञात नक्सलियों पर दर्ज किया गया है।

मृतक के घर में जुटे ग्रामीण।

मारे गए नक्सलियों का हुआ पोस्टमार्टम

गिरिडीह | झारखंड बिहार की सीमा पर भेलवाघाटी थाना क्षेत्र अंतर्गत गुनियाथर जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड़ में मारे गए तीनों नक्सलियों के शव का मंगलवार को सदर अस्पताल में तीन सदस्यीय चिकित्सक बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया। इस मौके पर मजिस्ट्रेट के रूप में देवरी बीडीओ कुमार देवेश द्विवेदी एवं खेरी महुआ एस डीपीओ राजीव कुमार तथा देवरी थाना प्रभारी उत्तम कुमार उपाध्याय उपस्थित थे। चिकित्सक बोर्ड में सदर अस्पताल के डॉ सुनील कुमार सिंह, डॉ एसबी चौधरी, डॉ सोहेल अख्तर शामिल थे। पोस्टमार्टम के उपरांत तीनों के शव को बर्फ में डालकर शवगृह में सुरक्षित रखा गया है। बताते चलें की सोमवर को शाम सात पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया था। नियमत: शव का पोस्टमार्टम दिन की रोशनी में किए जाने को लेकर रात को नहीं किया जा सका था।

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