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पारसनाथ में संभव शरण मंदिर का मुख्य द्वार देता हैं अहिंसा का संदेश

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 09:11 AM IST

Giridih News - पारसनाथ पर्वत पर जैनियाें के कई धर्मस्थल हैं जाे अहिंसा का संदेश देते हैं। भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र...

Parasnath News - possible asylum in parasnath gives main entrance to temple message of non violence
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पारसनाथ पर्वत पर जैनियाें के कई धर्मस्थल हैं जाे अहिंसा का संदेश देते हैं। भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रबंधक सुमन कुमार सिन्हा ने कहा कि जैन शास्त्र में कहा गया है कि अहिंसा परमो धर्म:। इसका जीता जागता प्रमाण है संभव शरण मंदिर के मुख्य गेट पर बनी कलाकृतियां। इन कलाकृतियाें में जैन धर्म के दर्शन काे उकेरा गया है। मंदिर के मुख्य गेट पर एक ही घाट पर सिंह एवं गाय काे पानी पीते दर्शाया गया है। साथ ही सिंह का बच्चा गाय का और गाय का बछड़ा शेरनी का दूध पीते दिखाया गया है। इस कलाकृति के माध्यम से भगवान महावीर के अहिंसा परमो धर्म: के संदेश काे समझाया गया है। वैसे पूर्व में भी मधुबन प्रवेश के पहले एक बोर्ड लगा होता था जिसमें लिखा रहता था मांसाहार एवं शराब वर्जित क्षेत्र आदेशानुसार उपायुक्त लेकिन अभी बोर्ड रोड चौड़ीकरण के बाद हट गया है और फिर नहीं लगाया गया है। सुमन कुमार सिन्हा ने कहा कि मधुबन मोड पर भी अहिंसा का संदेश देने वाले प्रतीक लगे हैं। पर्वत की तलहटी में बने कर्इ यात्री शेड पर भगवान महावीर के बताए अहिंसा के संदेश काे देखा जा सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा की महावीर जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर अहिंसा के प्रचार के लिए कम से कम महावीर जयंती के दिन संपूर्ण देश के बूचड़खाने बंद रखा जाए, एेसा प्रयास सरकार को करना चाहिए। भगवान महावीर के संदेशाें काे मंदिरों से निकाल कर चौक-चौराहों पर स्थापित करना चाहिए ताकि जैन धर्म के अहिंसा के संदेश का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार हो सके।

मुख्य द्वार व स्तंभ पर बनी ये कलाकृतियां दे रही जियो और जीने दो का संदेश

पारसनाथ में भगवान महावीर ने दिया था अहिंसा का संदेश : जैनियों के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल एवं आदिवासियों के मरांग बुरु पारसनाथ पर्वत पर अपने विचरण काल के दैारान भगवान महावीर ने संपूर्ण मानवता को अहिंसा का पाठ पढ़ाया थाा। पारसनाथ पर्वत पर जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने यहां निर्वाण प्राप्त किया। पारसनाथ के बारे में जैन ग्रंथा में कहा गया है कि एक बार बंदे जो कोई ताहि नरक पशु गति नहीं हाेर्इ अर्थात एक बार कोई भी पारसनाथ की वंदना कर ले उसे नर्क नहीं जाना पड़ेगा। इसी पारसनाथ में अपने विचरण काल में भगवान महावीर ने कहा था कि सभी को जीने का हक एवं अधिकार है। पारसनाथ की तराई में बहने वाली बराकर नदी काे जैन धर्म में ऋजु बालिका कहा गया है। इसी के तट पर भगवान महावीर को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

मधुबन में अाज निकलेगी श्रीजी की सवारी

मधुबन | मधुबन में आज महावीर जयंती की धूम रहेगी। जैनियों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन स्थित तमाम मंदिरों में जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म जयंती मनार्इ जाएगी। मुख्य समारोह आनंदा पार्श्वनाथ जिनालय में आयोजित की जाएगी। यहां से प्रातः श्रीजी की सवारी गाजे-बाजे के साथ निकाली जाएगी। जो मधुबन के प्रमुख मार्गो से गुजरती हुर्इ पांडुक शीला तक जाएगी। यहां पर भगवान का अभिषेक व विशेष पूजन आरती की जाएगी। इसके बाद पुणे आनंदा पार्श्वनाथ जिनालय में भगवान को विराजमान कर विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। जहां मधुबन में विराजित तमाम आचार्य मुनि साधू सन्यासियों द्वारा धर्म सभा को संबोधित किया जाएगा। वही धर्म से जुड़े प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है। दोपहर को विशाल भंडारे का भी आयोजन है जहां जैन समाज के अलावे और सारे लोग प्रसाद ग्रहण करेंगे। रात्रि विशेष रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जहां देश के कई प्रांतों से आए कलाकार अपना करतब दिखाएंगे। भजन मंडली अपना भजन प्रस्तुति करेंगे। यहां यह बता दे कि मधुबन में हर 1 वर्ष महावीर जयंती का आयोजन स्थानीय मधुबन जैन समाज द्वारा आयोजित की जाती है।

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