मुखिया में दोनों शक्ति समाहित हैं जो अधिकारी के पास भी नहीं : उपायुक्त

Giridih News - जलशक्ति अभियान के तहत देश के 256 जिले मंे जल शक्ति कार्याशाला का आयोजन प्रथम चरण में किया गया है। क्योंकि जल है तो कल...

Sep 14, 2019, 06:56 AM IST
Giridih News - the chief has both powers which even the officer does not have deputy commissioner
जलशक्ति अभियान के तहत देश के 256 जिले मंे जल शक्ति कार्याशाला का आयोजन प्रथम चरण में किया गया है। क्योंकि जल है तो कल है। वर्तमान में देश की 60 करोड़ अाबादी जलसंकट से जूझ रही है। गिरिडीह जिले में भी दो तीन माह पूर्व जिले के आधा हिस्से में ग्रामीण जल संकट से जूझ रहे थे। वहां टेंकर से पानी पहुंचाया गया। लिहाजा इस संकट से स्थाई निदान के लिए सबों को एकजुट होकर जल सरंक्षण जल संवर्द्धन के तहत काम करना होगा। नहीं तो आनी वाली पीढ़ी कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के तहत 92 प्रतिशत वर्षा का जल नदी नालों से बहकर समुन्द्र में चला जाता है, और समुद्र में जाते ही पानी खारा हो जाती है जो किसी काम का नहीं होता है। 8 प्रतिशत जल से पृथ्वी पर रहने वाले जीव जंतु का पालन हो रहा है। भारत सरकार ने इस भीषण जल संकट को देखते हुए जल शक्ति अभियान चलाया है। ये बातें गिरिडीह उपायुक्त राहुल सिन्हा ने कही। गिरिडीह नगर भवन में शुक्रवार को आयोजित दो दिवसीय जलशक्ति अभियान का उद्घाटन के बाद वे लोगों को संबाोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला में मुख्य डीडीसी मुकुंद दास, एसडीओ राजेश्वर प्रजापति, जिला कल्याण पदाधिकारी रामेश्वर चौधरी, एलडीएम रविन्द्र कुमार सिंह, भूमि संरक्षण पदाधिकारी दिनेश मांझी, कार्यपालक अभियंता विशेष प्रमंडल भोला राम, जिला मुखिया संघ के जिला अध्यक्ष देवनाथ राणा सहित डुमरी एसडीओ एवं खोरीमहुआ एसडीओ ने मुख्य रुप से हिस्सा लिया। इस कार्यशाला में जिले के सभी पंचायत के मुखिया, रोजगार सेवक, पंचायत सेवक और मनरेगा जेई भी शामिल थे। इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन डीसी राहुल कुमार सिन्हा, डीडीसी मुकुंद दास व डीपीआरओ रश्मि सिन्हा ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वल्लित कर किया। उपायुक्त ने कहा कि मुखिया में दोनों शक्ति समाहित है। इसी का परिणाम है कि स्वच्छ भारत मिशन अभियान में गिरिडीह जिला राज्य में प्रथम स्थान पर है। राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही तमाम लाभकारी व कल्याणकारी योजनाओं में मुखिया का हमेशा से साकारात्मक प्रयास रहा है। कहा कि जल शक्ति अभियान भारत सरकार की महत्वाकंाक्षी योजना है। इस अभियान पर मिशन के रुप में काम करना है। जिसमें हर वर्ग का सहयोग आवश्यक है। डीसी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सीधा संपर्क मुखिया का होता है। मुखिया में जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक दोनों शक्तियां समाहित है, जो देश के किसी नेता या पदाधिकारियों को प्राप्त नहीं है। लिहाजा मुखिया यदि चाह लंे तो हर कल्याणकारी योजना में गिरिडीह जिला नंबर वन पर आ सकता है।



सभी कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को जोड़ने का करें काम: डीसी

कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, अायुष्मान भारत योजना, किसान मानधन योजना की शुरूआत झारखंड से की गई है। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत 18 वर्ष से 30 वर्ष आयु के किसानों को 55 रुपये प्रतिमाह एवं 40 वर्ष से अधिक आयु वालोंं को 200 रुपये प्रीमियम भुगतान करना है। किसानों की उम्र 60 वर्ष पूर्ण होने के बाद 3 हजार से 5 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन के रूप में बीमा कंपनी उसे भुगतान करेंगे। कहा कि इस योजना से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने का काम करें। वर्तमान में इस योजना के तहत जिले के 5 हजार किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। आयुष्मान योजना के तहत 3 लाख 50 हजार लोगों का गोल्डेन कार्ड बनाया जा चुका है। कहा कि गिरिडीह जिला स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रथम स्थान पर है। जिला ओडीएफ भी हो चुका है। शौचालय उपयोग करने के लिए लोगों में सिर्फ व्यावहारिक बदलाव की जरूरत है। उन्होंने लोगों से प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने की अपील लोगांे से की है। क्योंकि प्लास्टिक नष्ट होने वाली वस्तु नहीं है। नाशा ने मंगल ग्रह पर प्लास्टिक से बने यंत्र को भेजा था, क्योंकि प्लास्टिक यंत्र कभी नष्ट नहीं होगी और यह आदिकाल तक उसी रूप में पड़ा रहेगा। डीसी ने कहा कि विधानसभा चुनाव करीब है, मतदाता संक्षिप्त पुनरीक्षण का काम चल रहा है। जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वे जरूरत से दर्ज करा लें, तभी लोकतंत्र के महापर्व में वे अपनी भूमिका अदा कर सकेंगे।

संबोधित करते डीसी व अन्य पदािधकारी।

वर्षा जल को कैसे करें संरक्षित इस पर फोकस करना जरुरी

उपायुक्त ने कहा कि जल शक्ति अभियान पर दो दिवसीय कार्यशाला में वर्षा जल को कैसे संरक्षित करें, इस पर फोकस करना है। उन्होंने ने कहा कि पृथ्वी का तीन चौथाई भाग पानी से भरा पड़ा है। फिर भी पानी की किल्लत हो रही है। कहा कि जीव-जंतु सब बारिश की पानी के भरोसे जीिवत है। जमीन के नीचे का जलस्तर पर भी बारिश पर ही आधारित है। लेकिन दुर्भाग्य है कि बारिश की 70 प्रतिशत पानी नदी नाले में बहकर चला जाता है। सिर्फ 30 प्रतिशत पानी उपयेागी है। उसी 30 प्रतिशत पानी से संपूर्ण सृष्टि चल रही है। लेकिन आबादी बढ़ने के कारण उससे भरपाई नहीं हो रही है। ऐसे में बारिश की पानी को राेकना हम सबों की जिम्मेवारी है। बारिश की पानी को बर्बाद होने से सबों को बचाना होगा। इसके अलावा घर के पानी को भी बर्बाद नहीं करें और उसे डोभा अथवा कंटूर बनाकर संरक्षित करें। जहां भी पानी का श्रोत है वहीं उसे रोकने का काम करें। घर की छत से भी यदि पानी गिर रहा है तो उसके लिए भी अपने घर के पास गड्‌ढे खोदकर उस पानी को जमा करें। चापानल के पास सोख्ता बनाकर जल को संरक्षित करें। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में अधिक से अधिक पेड़ लागाकर भी जल स्तर में वृद्धि कर सकते हैं।

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