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होली पर गजकेशरी योग, कल शाम 7.15 पर होगा दहन

एक मार्च की सुबह आठ बजकर पांच मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद भद्रा शुरु होकर शाम सवा सात बजे तक खत्म होगी।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 28, 2018, 02:35 AM IST

एक मार्च की सुबह आठ बजकर पांच मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद भद्रा शुरु होकर शाम सवा सात बजे तक खत्म होगी। इसलिए उस दिन भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन किया जाना चाहिए। इसके बाद सुबह दो मार्च को उत्साह और उमंग के साथ होली खेली जाएगी।

इस साल होली पर कुछ विशेष संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, होली पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ गजकेसरी योग का महासंयोग बन रहा है। यह संयोग कई राशि के जातकों के लिए खास रहेगा। यह संयोग करीब सौ वर्षों के बाद आया है।

होली के बाजार में छाई महंगाई : जिले में होली की तैयारी शुरू हो गई है। रंगों का बाजार सजने लगा है परंतु इस साल होली महंगी हो गई है। दरअसल, जीएसटी लागू होने के बाद यह पहली होली है। रंग और पिचकारियों में 18 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स देना होगा। अावासीय कॉलोनी में रंगाें की दुकान लगाने वाले विक्की लहेरी ने बताया कि रंग-गुलाल और पिचकारियों के महंगे होने के कारण बाजार में अभी उछाल नहीं अाया है। हलांकि इस साल बाजार में चाइनीज के बजाए हर्बल रंगों की मांग देखी जा रही है

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार होली पर बन रहा है कई जातकों के लिए सुखद संयोग

किस राशि के लोग किस रंग से खेलें होली

मेष-
लाल,पीला और सफेद

वृष- सफेद,हरा और नीला

मिथुन- हरा, नीला और सफेद

कर्क-सफेद, पीला और लाल

सिंह- लाल, गुलाबी, पीला, सफेद

कन्या- हरा, नीला और चमकीला सफेद

तुला- सफेद, हरा और नीला

वृश्चिक- लाल गुलाबी, नारंगी और पीला

धनु- पीला, गुलाबी और नारंगी

(जैसा, गोला के ज्योतिषाचार्य सुरेश्वर पांडेय ने बताया)

गजकेसरी योग में भगवान शिव को चढ़ाएं भांग

होली के हुड़दंग को छोड़कर इस बार आप भगवान भोलेनाथ को होली के दिन भांग, गुड़, बेलपत्र और दूध चढ़ाएं। एक सौ वर्ष के बाद यह मुहूर्त आया है। इसका लाभ उठाएं। होली के दिन आप भोलेनाथ के मंदिर पहुंचकर सुबह सात बजे से साढ़े नौ बजे के बीच जलाभिषेक करें और इसके तत्काल बाद अबीर, रोली के साथ पकवान भी चढ़ाएं। इससे आपके अशांत ग्रह शांत हो जाएंगे, साथ ही सुख-समृद्धि के साथ महादेव की असीम कृपा बनेगी। आपका रुका हुआ कार्य पूरा होगा। आपके इच्छित काम होंेंगे।'' लोकेश पंडा, पुजारी, छिन्नमस्तिका मंदिर।

भद्रा समाप्त होने पर होगा होलिका दहन

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन संध्या काल में भद्रा दोषरहित समय में होलिका दहन किया जाता है। होली जलाने से पूर्व उसकी विधि -विधान से पूजा की जाती है। अग्नि एवं भगवान विष्णु के निमित्त आहुतियां दी जाती हैं। एक मार्च की सुबह आठ बजकर पांच मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद शाम सवा सात बजे तक भद्रा शुरु हो जाएगा। इसलिए उस दिन भद्रा समाप्त होने पर होलिका का दहन किया जाएगा। '' असीम पंडा, पुजारी, छिन्नमस्तिका मंदिर।

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