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गोला की लाइफलाइन गोमती- पटासुर सूखी, 50 हजार लोगों की बढ़ी परेशानी

प्रखंड क्षेत्र की लाइफ लाइन मानी जाने वाली गोमती और पटासुर नदी गर्मी आने से पूर्व ही पूरी तरह सूख चुकी है। इस कारण...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 10, 2018, 02:45 AM IST

प्रखंड क्षेत्र की लाइफ लाइन मानी जाने वाली गोमती और पटासुर नदी गर्मी आने से पूर्व ही पूरी तरह सूख चुकी है। इस कारण क्षेत्र के लोगों को पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। बताया जाता है कि इसी दोनों नदियों के सहारे यहां की आधी आबादी निर्भर रहती है। अब दोनों के सूख जाने के बाद लोगों को पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है। लोग पानी के लिए चुआं खोदकर किसी तरह अपना काम निकाल रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है।

महिलाएं पानी के लिए अहले सुबह घर का सारा काम काज छोड़कर पानी की व्यवस्था में लगी रहती हैं। स्थानीय ग्रामीण नरेंद्रनाथ चौधरी ने बताया कि आज से बीस वर्ष पूर्व दोनों नदियों में गर्मी के दिनों में भी पानी देखने को मिलता था। लेकिन जैसे जैसे नदियों में अतिक्रमण होना शुरू हो गया, वैसे वैसे पानी की किल्लत भी शुरू हो गई। करीब 50 हजार की आबादी के समक्ष पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है।

कहां से निकलती हैं दोनों नदियां : दोनों नदियों का इतिहास काफी पुराना है। बरसात के समय ये नदियां काफी उफान पर रहती हैं। बाढ़ के कारण गोमती नदी पर बना छोटा पुल कई दिनों तक डूबा रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि गोमती नदी की उत्पत्ति बेटुलकला पंचायत के बंदरचुआं पहाड़ से जबकि पटासुर की उत्पत्ति सेरेंगातू पहाड़ से हुई है। नदियों के सूखने का सबसे ज्यादा कारण वर्तमान में जगह जगह ग्रामीणों द्वारा खेती के लिए मिट्टी से पानी को रोककर रखना बताया जाता है। वहीं सरकार द्वारा बनाए गए एक भी चेकडैम में पानी नहीं रहने से लोगों को दिनचर्या के काम में काफी असुविधा हो रही है। मनुष्य तो किसी तरह अपना काम निकाल ले रहे हैं। लेकिन पशु व मवेशियों को अपनी प्यास बुझाने में मशक्कत करनी पड़ रही है।

नदी में पानी नहीं रहने से क्षेत्र के करीब 50 हजार आबादी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रही है। लोगों के लिए यही नदियां पहले वरदान साबित होती थी। जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे नदियों में पानी की कमी भी होने लगी। इस नदी पर बीएस रोड,अग्रवाल टोला, बनिया टोला, पाठक टोला, कोटवार टोला, सुंडी टोला, खरैयाटांड, रोला बगीचा, डभातु, चोकाद, डुंडीगाछी आदि गांव के ग्रामीण पूरी तरह से आश्रित रहते हैं।

मार्च महीने की शुरुआत में ही सूख गई गोमती नदी।

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