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ग्राम बाल संरक्षण समिति को मजबूत बनाएं

जिला के विकास भवन के सभागार में बच्चों के अधिकार संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए बुधवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया।...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:25 AM IST
जिला के विकास भवन के सभागार में बच्चों के अधिकार संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए बुधवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर उपायुक्त श्रवण साय ने कहा कि ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति को सशक्त बनाएं। वर्कशॉप करा कर उन्हें कार्यों की पूर्ण जानकारी दी जाए। समिति सशक्त होगी तो सभी प्रकार के शोषण, कुपोषण, मानव तस्करी आदि का डाटा मिल पाएगा।

इससे समस्या का समाधान करने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि बच्चों के हित में कार्य करने वाली संस्था बहुत अधिक है, लेकिन धरातल पर कार्य की गति काफी धीमी है। प्रत्येक माह रोस्टर बनाकर मीटिंग कर सभी संस्था के कार्यों का रिव्यू किया जाएगा। गुमला को मानव तस्करी और बाल श्रम मुक्त जिला बनाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना है। इसके लिए हम सदैव तत्पर हैं। जिला एवं ब्लाक स्तर पर की मासिक बैठक सुनिश्चित करने हेतु जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया। बैठक में पीयूष जैन राज्य समन्वयक बाल सखा किशोर न्याय अधिनियम 2015 के नियम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर बच्चों के हित में काम करना चाहिए। सेव द चिल्ड्रन के कार्यक्रम समन्वयक झारखंड दिव्या ज्योति तिग्गा ने कहा कि सेव द चिल्ड्रन की ओर से बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए सिसई प्रखंड की 15 पंचायत में पंचायत कैडर बाल संरक्षण साथी का चयन किया गया है। जो बच्चों से संबंधित कार्यों को देखेंगे। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने कहा कि जिले में सभी गांव में ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति का गठन किया जा चुका है। सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन शंभू सिंह ने कहा कि गुमला में बच्चों के हित के लिए कार्य करने वाले जिला बाल संरक्षण इकाई सीडब्ल्यूसी, एनजीओ प्रशासन के सभी लोगों को मिलकर कार्य करना चाहिए। गुमला गरीब एवं पिछड़ा क्षेत्र है। जहां अज्ञानतावश बहुत से परिजन अपने बच्चों को काम करने के नाम पर बाहर भेज देते हैं। जिनका काफी शोषण होता है। कार्यशाला आयोजित कर परिजनों को जानकारी देने की आवश्यकता है। उन्हें जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा दें बाहर नहीं भेजें।