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रैयतों की बिना सहमति भूमि ले रही सरकार

जनजागरण वनाधिकार संघर्ष समिति आसनबेड़ा पाकरटांड का 8वां वार्षिक स्थापना दिवस बुधवार को मनाया गया। समिति के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:30 AM IST

जनजागरण वनाधिकार संघर्ष समिति आसनबेड़ा पाकरटांड का 8वां वार्षिक स्थापना दिवस बुधवार को मनाया गया। समिति के प्रवक्ता नील जस्टिन बेक ने कहा कि आठ वर्ष पूर्व पालकोट वन्य प्राणी आश्रयणी के नाम पर पालकोट, रायडीह और पाकरटांड के 83 मौजा को चिह्नित किया गया था। इसके विरोध में जन जागरण वनाधिकार संघर्ष समिति का गठन किया गया था।

सरकार की जनविरोधी नीति समिति के लिए चुनौती है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून, भूमि बैंक व बाघ-हाथी कॉरिडोर के माध्यम से सरकार जल जंगल जमीन पर हमला कर रही है। रैयतों की सहमति के बगैर जमीन अधिग्रहण कर सरकार पूंजीपतियों को देना चाहती है। सभा में पालकोट वन्य प्राणी आश्रयणी का विरोध भूमि बैंक का विरोध, हाथी कॉरिडोर का विरोध, राज्य के सभी एमओयू रद्द करने, भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून रद्द करने, विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन के नेता दामोदर तुरी की रिहाई करने आदि की मांग की गई।

इस मौके पर केंद्रीय अध्यक्ष भावनाथ सिंह, गुमला जिलाध्यक्ष रामप्रताप सिंह, सुकरा भगत, केश्वर सिंह, इसराइल बा, मक्सीमा टोप्पो, तीर्थनाथ मिश्रा आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन मथियस लुगुन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस मौके पर जोहन बिलुंग, हेमलता कुजूर, अमरनाथ सिंह, शीतल किसान व मथियस डुंगडुंग आदि मौजूद थे।

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Web Title: रैयतों की बिना सहमति भूमि ले रही सरकार
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