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10 लाख रुपए का इनामी जोनल कमांडर प्रकाश उरांव ने किया सरेंडर

प्रकाश उरांव ने बताया कि वह लोहरदगा के टोटो गांव का रहने वाला है। उसके पिता सीआरपीएफ में थे। वह तीन भाई है, जिसमें...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:40 AM IST

10 लाख रुपए का इनामी जोनल कमांडर प्रकाश उरांव ने किया सरेंडर
प्रकाश उरांव ने बताया कि वह लोहरदगा के टोटो गांव का रहने वाला है। उसके पिता सीआरपीएफ में थे। वह तीन भाई है, जिसमें दो अब नहीं रहे। पिता रिटायर्ड हुए तो उन्हें लकवा मार दिया। बड़ा भाई बाहर रहकर पढ़ाई करता था। प्रकाश की जिम्मेदारी बढ़ती चली गई। इसी बीच मां का भी निधन हो गया। प्रकाश ने किसी तरह से मैट्रिक तक की पढ़ाई की। सीआरपीएफ में भी भर्ती के लिए काफी प्रयास किया, सफलता नहीं मिली। इसी दौरान गांव में प्रतिबंधित संगठन एमसीसी के सदस्य मुरारी, टोहन और अन्य आते थे। वे गांव वालों को मीटिंग कर पुलिस के खिलाफ भड़काते थे। उन्हीं की बातों में आकर 1998 में उदय उरांव, बृजमोहन उरांव के साथ वह दस्ते में शामिल हो गया। शुरुआत में वह भंडरा, चट्टी, केरो इलाके में छह सात महीने तक रहा। वर्ष 1999 में प्रकाश के कार्य को देखते हुए एरिया कमांडर बना दिया गया। फिर चंदवा जंगल में बंदूक चलाने की ट्रेनिंग मिली। वर्ष 2000 में लोहरदगा पश्चिम में नकुल के साथ प्लाटून में रहा। उस समय एक प्लाटून का डिप्टी कमांडर का जिम्मा मिला। इसके बाद 2001 में सेक्शन कमांडर बना दिया गया। फिर 2002 में सबजोनल कमांडर बनाया गया और लोहरदगा पश्चिम में पूरे प्लाटून का जिम्मा दिया गया। इसी बीच टीम में रहने के साथ प्रकाश की शादी हो गई। इसी बीच प्रकाश का विवाद जोनल कमांडर धीरज व्यास के साथ हो गई। फिर वे दो प्लाटून लेकर पार्टी से छह सात महीने अलग रहे। फिर पार्टी से मैनेज होने के बाद वर्ष 2003 में मध्य बिहार जोनल कमेटी में प्रकाश को शामिल कर लिया गया और पुराना क्षेत्र लोहरदगा पश्चिम दे दिया गया। वर्ष 2005 में पार्टी के विलय के समय दिनेश उर्फ चश्मा द्वारा बुलाए जाने पर प्रकाश वापस टीम में आ गए। फिर उत्तरी लातेहार में 2005 से 2006 तक रहा। मई 2006 में प्रकाश को खलारी में हुए एक कांड में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

प्रकाश को चेक देते अधिकारी।

2012 के बाद प्रकाश का दस्ते में कद हुआ मजबूत

2012 में जेल से छूटने के बाद प्रकाश 2013 के फरवरी में दस्ता में फिर वापस आ गया। वह नकुल के दस्ते में चलने लगा। सितंबर 2015 में दिनेश उर्फ चश्मा के पार्टी छोड़कर प्रकाश के निकल जाने से पूरी तरह से पार्टी में उथल-पुथल मच गया। अक्टूबर 2015 से अप्रैल 2016 तक वह बूढ़ा पहाड़ में अरविंद जी उर्फ देव कुमार सिंह के साथ रहा। इस दौरान उसे कई बड़ी जिम्मेदारियां दी गई। अगस्त 2016 में उसे गुमला सबजोन का सचिव बनाया गया। सितंबर 2016 से फरवरी 2018 तक वह बूढ़ा पहाड़ के आसपास के क्षेत्र में रहा। इसी बीच जब सीनियर कैडर के दिनेश उर्फ चश्मा, नकुल यादव, मदन यादव, जैसे नक्सली सरेंडर करने लगे, तो उनसे प्रभावित होकर प्रकाश ने भी सरेंडर करने का मन बना लिया और 31 मार्च को सरेंडर कर दिया।

सेरेंगदाग में डॉक्टर की गला रेत कर दी थी हत्या

प्रकाश पर हत्या समेत कई मामले दर्ज हैं। सेरेंगदाग में सितंबर 2016 में एक आरएमपी डॉक्टर की उसने गला रेत हत्या कर दी थी। इसके अलावा उसपर किस्को थाना और हेरहंज थाना में भी हत्या का मामला दर्ज है। उसपर आर्म्स एक्ट, सीएलए एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम में कई मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं। `

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