कोयल नदी में स्नान कर लोगों ने की सर्प गुफा और शिव मंदिर में पूजा, खाया चूड़ा-तिलकुट

Gumla News - भास्कर न्यूज | लोहरदगा/सेन्हा मकर सक्रांति पर जिले के सेन्हा प्रखंड के चितरी डांडू दक्षिणी कोयल नदी के चट्टानों...

Jan 16, 2020, 07:21 AM IST
Lohardaga News - after bathing in the river koyal people worshiped in the snake cave and shiva temple ate chuda and tilkut
भास्कर न्यूज | लोहरदगा/सेन्हा

मकर सक्रांति पर जिले के सेन्हा प्रखंड के चितरी डांडू दक्षिणी कोयल नदी के चट्टानों और इसके तटों पर आयोजित चितरी मेला में बुधवार को हजारों लोग शामिल हुए। सभी ने पारंपरिक व ऐतिहासिक मेले का जमकर लुत्फ उठाया। लोगों की सुरक्षा के लिए डीएसपी मुख्यालय परमेश्वर प्रसाद की अगुवाई में सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर चाक चौबंद व्यवस्था की थी। हालांकि संकीर्ण सड़क के कारण लोगों को मुख्य पहुंच पथ से मेला स्थल तक जाने आने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

लोगों ने कहा कि अत्यधिक गाडिय़ों के आवागमन से परेशानी के बावजूद प्रशासन सहित जनप्रतिनिधि इस सड़क के चौड़ीकरण की ओर ध्यान नहीं देते। दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था में शांति पूर्वक मेला संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन का आभार भी जताया। सुबह से ही श्रद्धालु मेला परिसर में जुटने लगे थे। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कोयल नदी में स्नान-ध्यान कर सर्प गुफा एवं शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की और सुख समृद्धि की कामना की। इसके बाद नदी तट पर चूड़ा, गुड़, तिलकुट, दही तथा घर से बनाकर लाये भोजन को परिजनों, मित्रों और संबंधियों के साथ बांटकर खाया। मेला में लोहरदगा, सेन्हा, भंडरा, सिसई, भरनो, बिशुनपुर, घाघरा, कैरो, कुडू, किस्को समेत आसपास के इलाकों से हजारों लोग शामिल हुए। सभी ने झूला, सजावट की वस्तुओं, ईख, मिठाई, बलून, तिलकुट, मटर, चाट, गुपचुप आदि का भी मजा लिया। यहां लगाए गए जादू के खेल का लोगों ने लुत्फ उठाया। वहीं मेला स्थल में बीडीओ सच्चिदानंद महतो, सीओ हरिशचंद्र मुंडा, थाना प्रभारी अनिल उरांव, धनंजय कुमार पासवान, बीईईओ अनिल कुमार मिश्रा भ्रमण करते रहे।

मेले में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते डीएसपी।

400 साल से लग रहा ऐतिहासिक चितरी घाघ मेला

दक्षिणी कोयल नदी तट में ऐतिहासिक चितरी घाघ मेला 400 सालों से अधिक समय से लग रहा है। चितरी गांव लोकोत्सवो और धार्मिक रीति रिवाजों के लिए प्रसिद्ध है। प्रकृति की अनुपम छटाओं के बीच यहां के जीवन में सादगी, सच्चाई, सहजता, स्नेह, आपसी प्रेम और भाईचारे को संजोया है। इसका धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व इसलिए है कि नदी उत्तर से दक्षिण की ओर बहकर जाती है। पूर्व और पश्चिम दिशा में भगवान भोले नाथ का मंदिर है। हर धर्म के लोगों की भागीदारी होने के कारण यह मेला सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया है।

मेला से लौटते समय सड़क जाम में फंसे लोग, रहे परेशान

मेले में लगाए गए झूले का आनंद लेते लोग।

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