नहरों में नहीं छोड़ा पानी, किसान चिंतित

Gumla News - भास्कर न्यूज | लोहरदगा/कैरो जिले के कैरो व भंडरा प्रखण्ड क्षेत्र में पड़ने वाले नंदनी जलाशय से निकलने वाली तीन...

Dec 10, 2019, 09:21 AM IST
Lohardaga News - no water left in canals farmers worried
भास्कर न्यूज | लोहरदगा/कैरो

जिले के कैरो व भंडरा प्रखण्ड क्षेत्र में पड़ने वाले नंदनी जलाशय से निकलने वाली तीन नहरों में से पूरब दिशा स्थित नहर से पानी नहीं छोड़ा जाना प्रखण्ड क्षेत्र के किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। नहर में नियमित पानी छोड़े जाने की उम्मीद से किसानों ने अपने अपने खेतों में बड़े पैमाने पर रबी फसल की बुआई की है। अब नहर में नियमित रूप से पानी नहीं छोड़े जाने से खेतों में पटवन नहीं हो पा रही है। जिससे गेहूं आदि के अंकुरण में परेशानी आ रही है। कुछ किसान तो लगभग आठ दिन पहले ही बुआई कर खेत को पटवन के लिए तैयार कर चुके हैं लेकिन सब बेकार साबित हो रहा है। लंबे समय तक पटवन नहीं होने से बीज अंकुरित नहीं हो पा रहे हैं। वहीं गौरेया, कबूतर आदि पक्षी भी बीज को चुग रहे हैं। विगत शनिवार रात्रि को नहर में पानी कैरो पाठक बगीचा तक पहुंचा। जिससे दो चार किसान पटवन कर सके। बाकी किसान भी खुश थे कि अब पटवन की जा सकती है। लेकिन रविवार रात में ही नहर सूख गई और किसान देखते ही रह गए। ज्ञात हो कि नंदनी जलाशय से तीन नहरें निकलती हैं। जिससे भंडरा, कैरो और कुडू़ प्रखण्ड के आकाशी, बंडा, नरौली, खंडा, उत्तका, कैरो, नवाटोली, बिराजपुर, जामुनटोली, नगड़ा, एडादोन, सुकूरहुटू, सिंजो, बारीडीह, उमरी, नाम नगर, पतराटोली आदि गांव के हजारों एकड़ भूमि सिंचित होती है। यदि तीनों नहरों में नियमित रूप से पानी छोड़ा जाएगा तो क्षेत्र के किसान बड़े पैमाने पर कृषि कार्य कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। विदित हो कि विगत वर्षों में तीनों नहरों का जीर्णोद्धार कार्य कराया गया है । इससे किसानों की उम्मीदें बढ़ गई है। लेकिन समय से पानी नहीं छोड़ने से किसान मायूस हैं।

पानी नहीं छोड़े जाने से सूखी हुई नहर।

नहर में पानी नहीं छोड़े जाने से खेतों में अंकुरित नहीं हुए गेहूं के बीज।

समय से पानी नहीं छोड़ा गया तो बर्बाद हो जाएंगे

किसान शहाबुद्दीन अंसारी, इस्माइल अंसारी, साजिद खान आदि का कहना है कि नहर के भरोसे ही खेतों में गेहूं आदि की बुआई किए थे। यदि समय से नियमित रूप से पानी नहीं छोड़ा गया तो हम सब किसान बर्बाद हो जाएंगे। खेती करने में काफी लागत आती है। खेतों में बुआई के लिए पचास किलो गेहूं बीज की कम से कम दस हजार की लागत आती है और पानी के अभाव में यदि नुकसान होता है तो किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी। उनका कहना है कि नहर की सही से देखभाल नहीं होती है जिससे भी पूरी नहर में पानी नहीं पहुंच पाता है।

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