अहिंसा का अर्थ है न तो हिंसा करना और न सहना

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:51 AM IST

Gumla News - जैन भवन में अायोजित सत्संग सभा में जैन मुनि डा. पदमराज महाराज ने अहिंसा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अहिंसा का...

Simdega News - nonviolence means neither violence nor tolerance
जैन भवन में अायोजित सत्संग सभा में जैन मुनि डा. पदमराज महाराज ने अहिंसा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अहिंसा का अर्थ न तो हिंसा करना है और न ही हिंसा को सहना है। उन्होंने कहा कि परमात्मा प्रेमपूर्ण होते हैं इसलिए प्रभु की प्राप्ति का मार्ग भी प्रेम से भरा होना चाहिए। जो व्यक्ति प्रभु के मार्ग का पथिक है वह किसी से घृणा नहीं कर सकता। वह स्वयं को घृणा से अलग कर लेता है तभी उसके भीतर प्रेम, दया, करूणा आदि उत्पन्न होते हैं। इन्हीं में से अहिंसा का जन्म होता है। अहिंसा का अर्थ कायरता कदापि नहीं है। जब व्यक्ति के भीतर अहिंसा व्याप्त होती है तो उसके प्रत्येक व्यवहार में प्रेम और सदभावना प्रकट होती है। यदि व्यक्ति के व्यवहार में द्वेष और दुर्भावना प्रकट हो रही है तो इसका अर्थ की व्यक्ति में धर्म का अभाव है। जाे मनुष्य के भीतर होता है वही बाहर प्रकट होता है। उन्होंने कहा कि यदि हम प्रभु को पाना चाहते हैं तो हमें घृणा से मुक्त होना होगा। पापी व्यक्ति पर भी घृणा नहीं बल्कि दया करनी चाहिए। वह व्यक्ति सचमुच में दया का पात्र होता है क्योंकि वह भीतर से कमजोर हो जाता है। तभी क्रोध, अभिमान, छल कपट, द्वेष आदि की चपेट में आ जाता है। ऐसे व्यक्ति को घृणा करके नहीं बल्कि प्रेम का सींचन कर सुधारा जा सकता है। जैन मुनि ने अभय कुमार के बारे में सुनाते हुए कहा कि धर्मात्मा व्यक्ति की एक ही कमजोरी होती है, धर्म। गलत लोग धर्म का बाना पहनकर धर्मात्मा काे ठगते हैं यह सबसे निंदनीय प्रवृति है। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति को बार -बार मुर्ख नहीं बनाया जा सकता है। सत्संग सभा में गुरू मां ने मनमोहक भजन प्रस्तुत किए। प्रभु आरती, मंगल पाठ और प्रसाद वितरण के साथ सभा का समापन किया गया।

श्रद्धालुओं के साथ जैन मुनि।

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