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शेड व बाजार की छप्पर के नीचे सोकर रात गुजारती है फूलमनी
कामडारा प्रखंड स्थित गांव हाजड़ा की एक सत्तर वर्षीय विकलांग वृद्धा फूलमनी लोहराइन रविवार को चंदा टोली गांव जाने वाली पथ पर बैठकर रेंगते हुये चंदा टोली गांव की ओर जा रही थीं। वह फिलहाल भीख मांगकर व रात में किसी शेड व बाजार की छप्पर के नीचे सोकर सुबह कि किरण देखती है। यह सिलसिला पिछले तीन माह से निरंतर जारी है। उक्त वृद्धा ने बताया कि उसका घर हाजड़ा में है उसके पति का नाम स्वः कंदरा लोहरा है। उसके चार पुत्र थे वे सभी जब छोटे-छोटे थे उसी दौरान बारी-बारी से अज्ञात बिमारी के चपेट मे आकर सभी मौत के मुंह मे समा गये। इसके अलावा उनके तीन बेटियां थी, तीनाें की मौत हो चुकी है, जबकि उसका एक बेटी का विवाह गांव छोटकोईली में है।
वृद्धा फूलमनी ने बताया कि उसके पति की मौत हो जाने के बाद उसके भैंसुर व बेटा ने उसके घर को कब्जा कर घर से बाहर निकाल दिया। उसके बाद वह अपने बेटी के ससुराल गांव कोईली में पिछले एक साल से रह रही थी। उसका पारिवारिक स्थिति भी काफी दयनीय है। वहीं दमाद सुकरु शराबी किस्म है। उसने लगभग तीन माह पूर्व घर से मारपीट कर बाहर कर दिया। वहीं कोईली गांव में रहने के दौरान ही एक पुल से गिरने के कारण उसका पैर टुट चुका है। वह चलने-फिरने में असमर्थ है। इस बावजूद घर से निकाल दिये जाने बाद वह गांव-गांव बैठकर रेंगते हुए जाती है तथा ग्रामीणों द्वारा जो कुछ मिलता है उसे खाकर किसी सरकारी शेड व छप्पर के नीचे सो जाती है। फिलहाल वह वृद्धा चंदा टोली गांव मे है शाम होते ही बाजार टांड़ चली जाती है। विकलांग वृद्धा फूलमनी ने बताया कि उसको वृद्धा पेंशन मिलता था परंतु ग्रामीण बैंक का पास बुक बदल जाने व आधार में गड़बड़ी होने की बात कहकर अब पिछले दो साल से वृद्धापेंशन भी मिलना बंद हो गया है। उसके पास लाल राशन कार्ड भी था जिसे उसके रिश्तेदार सुरेश लोहरा ले लिया है जिसके कारण अब राशन भी नही मिलता है। विदित हो कि सरकार द्वारा गरीब ग्रामीणों की कल्याण के लिये विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलायी जा रही है। वहीं अब देखना यह है कि उक्त विकलांग व बेसहारा वृद्ध फूलमनी को कब इंसाफ व जीने का सहारा मिल पाएगा।
सड़कों पर रेंगती फूलमनी।