सरहुल सहनशीलता और सादगी का प्रतीक

Gumla News - सरहुल पर्व पर निकली शोभा यात्रा में मांदर बजाते बिंदेश्वर उरांव व अन्य। भास्कर न्यूज|कैरो प्रकृति पर्व सरहुल...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 09:00 AM IST
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सरहुल पर्व पर निकली शोभा यात्रा में मांदर बजाते बिंदेश्वर उरांव व अन्य।

भास्कर न्यूज|कैरो

प्रकृति पर्व सरहुल के मौके पर कैरो प्रखण्ड के हनहट गांव में मंगलवार को सरना आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा भव्य रूप से शोभायात्रा निकाली गई। सरना धर्म प्रेमी, पहान पुजार के नेतृत्व में अपने सांस्कृतिक वेशभूषा में सरना आदिवासी समाज द्वारा हनहट में सरहुल की शोभायात्रा निकली। प्रकृति पर्व सरहुल के मौके पर पहान सोमरा उरांव पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई। वहीं शोभायात्रा में समाज के लोगों ने पारंपरिक वेश भूषा के साथ नृत्य-संगीत में झूमते हुए बढ़चढ कर हिस्सा लिया। शोभा यात्रा में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री बिंदेश्वर उरांव शामिल हुए। बिंदेश्वर उरांव सामाजिकता, राजनीति, शैक्षिक क्षेत्र में दशकों से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। शोभायात्रा में शामिल होकर वे लोगों के साथ मांदर बजाकर उत्साह बढ़ाया। आस-पास गांवों के भारी संख्या में सरना आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए। शोभायात्रा के दौरान सड़क में आदिवासी संस्कृति और प्रकृति की सुंदर झलक देखने को मिली। बड़ी संख्या में पुरुष व महिलाएं एकत्रित हुए थे।

हनहट में मुख्य शोभायात्रा निकाले जाने के दौरान विभिन्न समुदाय के लोगों ने गर्मजोशी से जुलूस का स्वागत भी किया। शोभायात्रा में महिला-पुरुष परंपरागत नृत्य व जनजातीय संगीत के साथ शामिल हुए। मौके पर बिंदेश्वर उरांव ने लोगों को सरहुल पर्व के मौके पर संदेश के रूप में कहा कि प्रकृति पर्व सरहुल सहनशीलता व सादगी का प्रतीक है। प

्रकृति कभी किसी से भेदभाव नहीं करती है और सबको एक समान देखती है। प्रकृति भी त्याग के ही प्रतिमूर्ति है, जो सब पीड़ा सहकर भी मौन रहती है। ये हम सबके लिए एक बहुत बड़ी सीख है। आज सभी को प्रकृति प्रेम से जुड़कर रहना होगा तभी सभ्यता बच पाएगी। आदिवासी समाज आदिकाल से प्रकृति के उपासक रहे है। मौके पर बजरंग उरांव, श्यामसुन्दर उरांव, संजीव शुक्ला, लाला उरांव, सोमरा उरांव, लक्ष्मण उरांव, शत्रु उरांव, राजन उरांव, शत्रुघ्न उरांव, सकरा भगत, नागेश्वर उरांव, रामेश्वर उराव, संदीप उरांव सहित काफी संख्या में आदिवासी सरना समाज के लोग मौजूद थे।

शोभा यात्रा में शामिल होकर नृत्य करती समाज की महिला व युवतियां।

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