आत्मा का भोजन परमात्मा, सत्संग का मतलब संघ में साथ रहना, बुराई हटा अच्छाई ला दे यही सत्संग

Gumla News - रायडीह प्रखंड मुख्यालय स्थित नवागढ़ पतराटोली के दुर्गा मंदिर प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद भागवद कथा ज्ञानयज्ञ...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:31 AM IST
Raidih News - the food of the soul is divine the meaning of satsang living in union bring evil away goodness this satsang
रायडीह प्रखंड मुख्यालय स्थित नवागढ़ पतराटोली के दुर्गा मंदिर प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद भागवद कथा ज्ञानयज्ञ शुरू हो गया। राष्ट्रीय कथा वाचिका श्रीधाम वृन्दावन की सुमन किशोरी जी ने कहा कि श्रीमदभागवत कथा का जो आयोजन करते हैं उनके दिवंगत पूर्वज भी कथा स्थल पर विराजमान होकर खुशियां मनाते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। यह कथा स्वर्ग लोक में भी नहीं होता है। भगवान की यह कथा मृत्यु लोक को ही प्राप्त है। संतों की महिमा भगवान से भी बढ़कर है। इस धराधाम में जबतक कथा रहेगी तबतक मृत्युलोक में सर्वत्र वीर हनुमान जी विराजमान रहेंगे। श्री ने भागवद की रचना की। ये साथ शब्द के हैं। ये ही शब्द सप्ताह के सात दिन होते हैं और इसी सात दिनों में हमे अपना जीवन व्यतीत करना है। आत्मा का भोजन परमात्मा है। सत्संग का मतलब संघ में साथ रहना। अपनी बुराई को हटा दे और अच्छाई को ला दे यही सत्संग है। भगवान का नाम लेने के लिए कोई शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। वे आंनद दाता हैं। उनका नाम उच्चारण से ही आनंद की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि विधवा स्त्री कितनी भी सुंदर हो पति के बिना उसका जीवन का कोई मोल नहीं। उसी प्रकार श्रद्धा और भक्ति के बिना जीवन अधूरा है। इसके पूर्व सरकारी कृषि फार्म रायडीह के स्थल पर यजमान विनय लाल और उनकी धर्म प|ी चंदा लाल समेत सपरिवार को वैदिक रीति रिवाज से वृन्दावन से आये पंडितों ने पूजा अर्चना कराया। फिर सरना स्थल पर बैगा टूना नगेशिया ने पूजा कराया। मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

कथा वाचिका सुमन किशोरी।

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