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कबरा कला में मिले मृदभांड़ और टेराकोटा के खिलौने

हैदरनगर प्रखंड के कबरा कला गांव में आर्कियोलॉजिकल सर्वे अॉफ इंडिया (एएसआई रांची) की ओर से की जा रही खनन में मृदभांड...

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2018, 02:40 AM IST
हैदरनगर प्रखंड के कबरा कला गांव में आर्कियोलॉजिकल सर्वे अॉफ इंडिया (एएसआई रांची) की ओर से की जा रही खनन में मृदभांड के पर्याप्त टुकड़े एवं टेराकोटा के खिलौने के साथ साथ पक्की ईंटों की दीवार मिली है। विभिन्न कालों के मृदभांड के टुकड़े और बहुतायत टेराकोटा के खिलौने के अलावा ग्रामीणों के पास से मिले नए अवशेषों में सुंदर प्रस्तर मुहर, कीमती व पारदर्शी क्वार्ट्ज के गोल और अंडाकार मनके, प्रिंटेड चूडि़यां आदि मिले हैं। प्रस्तर मुहर पर कोई लिपि अंकित है, जो अब तक पढ़ी नहीं जा सकी है। कीमती पत्थरों के मनके छिद्रयुक्त हैं। इससे स्पष्ट होता है कि प्राचीन काल में इसे लोग आभूषण की तरह गले में पहनते थे।

चार जनवरी से एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. हरिओम शरण और सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. पूनम बिंद के नेतृत्व में कबरा कला गांव के तीन स्थानों पर पुरातात्विक उत्खनन चल रहा है। कबरा कलां की सभ्यता को प्रकाश में लाने के लिए विगत 20 वर्षों से सोन घाटी पुरातत्व परिषद की टीम प्रय|शील थी। पहले आए पुरातत्वविदों ने ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए पुरावशेषों के आधार पर कबरा कला की सभ्यता को नवपाषाण कालीन बताया था। पुरातत्वविदों ने यह भी बताया था कि विभिन्न कालों में भी यहां की सभ्यता सोन और उसकी सहायक नदी उत्तर कोयल के संगम के कारण आबाद रही है।

महाजनपद काल में यहां की सभ्यता नगरीय थी

पूरातत्वविद व इतिहासकार दावा है कि कबरा कला गांव में बिखरे व जमींदोज अवशेषों से स्पष्ट होता है कि यहां की सभ्यता महाजनपद काल में नगरीय थी। नगरीय सभ्यता में नाली के पानी के निकास के लिए रिंगवेल होते थे, जो यहां आज भी मौजूद है। पर्याप्त ईंटों के अवशेष और उत्तर काली पालिश मृदभांड के टुकड़े का मिलना भी नगरीय सभ्यता की ओर स्पष्ट संकेत है। साथ ही प्राचीन कालीन व्यापारिक मार्ग पाटलिपुत्र से कलिंग और उज्जैन जाने वाला पथ पर कबरा कला का स्थित होना भी सिद्ध करता है कि यह व्यापारिक नगर था।

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