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चहका का जीर्णोद्धार नहीं, तो होगा आंदोलन

प्रखंड के दो स्थानों पर टूटे चहका का अब तक जीर्णोद्धार नहीं कराए जाने से ग्रामीण किसानों में उबाल है। रविवार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 12, 2018, 02:45 AM IST

प्रखंड के दो स्थानों पर टूटे चहका का अब तक जीर्णोद्धार नहीं कराए जाने से ग्रामीण किसानों में उबाल है। रविवार को समाजसेवी बीरेंद्र पासवान, दिनेश सिंह, रामप्रवेश प्रजापति सहित कई ग्रामीण किसानों ने हैदरनगर के बरवाडीह, बरेवा में बीते डेढ़ दशक से टूटे चहका स्थल का जाएजा लेने के बाद बरवाडीह में आमसभा की।

इसकी मरम्मत या जीर्णोद्धार बरसात पूर्व नहीं कराया गया तो वे जोरदार आंदोलन शुरू करेंगे। इससे पूर्व किसानों ने सूबे से सीएम से मिलकर वस्तुस्थिति से अवगत कराने का निर्णय लिया है। आक्रोश इस बात को लेकर है कि दर्जनों गांवों के करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर भूमि में बाधित सिंचाई कार्य को किसी भी प्रतिनिधि ने गंभीरता से नहीं लिया, जिससे संबंधित गांवों किसानों व परिजनों को पलायन करना विवशता बनी रही।

किसानों ने कहा कि सरकार सूबे में जल संरक्षण के नाम कई बड़ी योजनाओं में लाखों, करोड़ों रुपये पानी में बहाने में लगी है। पर ग्रामीण क्षेत्र की पुरानी व धराशायी योजना को ठीक कराने के प्रति गंभीर नहीं, जिससे उक्त चहका में कई सालों से पानी रुकने के बजाय लाखों क्यूसेक पानी सीधे सदाबह नदी में बहकर बर्बाद हो रही है। सभा की अध्यक्षता बीरेंद्र पासवान जबकि संचालन उमाकांत पासवान ने की। मौके पर सुनील कुमार रंजन, रोहित कुमार मेहता, कुंडल पासवान, उपेंद्र प्रसाद, रामप्रवेश राम, बबलू मेहता, आनंद कुमार सहित कई अन्य किसान शामिल थे।

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