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इंसानियत की हिफाजत में दी बाबू कुंवर सिंह ने कुर्बानी

बड़ा शिवालय के समीप सद्भावना वाहिनी के तत्वावधान में समाज की दशा-दिशा विषयक चिंतन कार्यक्रम का आयोजन बाबू कुंवर...

Dainik Bhaskar

Apr 25, 2018, 02:35 AM IST
इंसानियत की हिफाजत में दी बाबू कुंवर सिंह ने कुर्बानी
बड़ा शिवालय के समीप सद्भावना वाहिनी के तत्वावधान में समाज की दशा-दिशा विषयक चिंतन कार्यक्रम का आयोजन बाबू कुंवर सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में किया गया। इसमें मुख्य अतिथि बाबू कुंवर सिंह के वंशज राजीव रंजन सिंह ने कहा कि बुजुर्ग अवस्था में उनके पूर्वज बाबू कुंवर सिंह ने मजहब नहीं बल्कि इंसानियत की हिफाजत के लिए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में कुर्बानी दी। वहीं जोश व जज्बा के साथ वर्तमान पीढ़ी को भी सामाजिक समरसता को कायम करने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत आ गई है।

उन्होंने कहा कि उसी दौरान उनके पूर्वज बाबा अमर सिंह ने पलामू आकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था। युवा कांग्रेसी नेता पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह के प्रपौत्र आनंद प्रताप सिंह ने कहा कि इस देश में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में कुर्बानी देकर बाबू कुंवर सिंह ने मानव जाति के विकास की यात्रा का मार्ग प्रशस्त किया था। बावजूद इसके उनकी वीरता की गाथा को समेट कर रख दिया गया था। उन्होंने उनकी वीरता की गाथा से प्रेरणा लेते हुए समाज की दशा व दिशा को बदलने के लिए हुसैनाबाद क्षेत्र के युवाओं व बुजुर्गों को आगे आने का आह्वान किया। साथ ही धर्म व जाति के नाम पर समाज को बांटने वालों का प्रतिकार करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे ही इस क्षेत्र में लोगों का प्यार व आशीर्वाद मिलता रहा, तो सकारात्मक दिशा में समाज की तरक्की में अपना योगदान देते रहेंगे। वरीय कांग्रेसी हृदयानंद मिश्रा ने कहा कि आनंद प्रताप में असीम राजनीतिक-सामाजिक सेवा भावना समाहित है।

सांप्रदायिकता के जुल्मों-सितम के खिलाफ कुंवर सिंह जैसा बनकर इनके साथ कदम में कदम मिलाकर चलने का आह्वान उन्होंने किया। पूर्व मुखिया अबु नसर सिद्दीकी ने कहा कि बहादुरों का मजहब इंसानियत होता है। जनता की हिफाजत उनका मजहब। परंतु वर्तमान हुकूमत मजहब के नाम पर तफरका पैदा करने में जुटा है। इससे इस देश व पूरी जमात को बचाने के लिए बाबू कुंवर सिंह के राह पर चलने की जरूरत आ गई है। कार्यक्रम में समिति के व्यास सिंह के अलावा शिक्षक राजेश नंदन सिंह, रामजी सिंह पूर्व मुखिया, प्रेमतोष सिंह, अवधेश सिंह, जगदीश राम, धर्मदेव राम, अवध किशोर सिंह पूर्व प्राचार्य जीएलए कॉलेज, शाह मोहम्मद खां व अन्य वक्ताओं ने संबंधित विषय पर प्रकाश डाला।

संचालन सेवानिवृत शिक्षक अशफाक अहमद ने जबकि कार्यक्रम को सफल बनाने में गुप्तेश्वर पांडेय पूर्व मुखिया, गुड्डू सिंह, वचन सिंह, नंद कुमार सिंह, सिद्दी सिंह, अरूण सिंह, उमा शंकर सिंह, व अन्य ने योगदान किया। हाजी नेमतुला ने आगत अतिथियों की पगड़ी पोशी की। बाबू कुंवर सिंह के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने किया।

समाज की दश-दिशा विषयक चिंतन कार्यक्रम में शामिल अतिथि व अन्य।

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