• Home
  • Jharkhand News
  • Haidarnagar
  • बुद्ध और बौद्ध के चिह्न हर तरफ दिखते हैं पलामू में
--Advertisement--

बुद्ध और बौद्ध के चिह्न हर तरफ दिखते हैं पलामू में

सोन एवं उसकी सहायक नदी उत्तर कोयल की घाटी में पसरा पलामू जिले में विगत ढाई हजार वर्ष से लेकर बारहवीं शताब्दी तक के...

Danik Bhaskar | Apr 30, 2018, 02:50 AM IST
सोन एवं उसकी सहायक नदी उत्तर कोयल की घाटी में पसरा पलामू जिले में विगत ढाई हजार वर्ष से लेकर बारहवीं शताब्दी तक के बौद्ध धर्म के अवशेष खेतों से बस्तियों तक तथा जंगलों से पहाड़ों तक बिखरे पड़े हैं। विडंबना है कि इन अवशेषों का कोई सुध लेने वाला नहीं है- न सरकार,न जनता और न ही बौद्ध धर्म के अनुयायी ही। यहां बिखरे बौद्ध अवशेषों में बौद्ध स्तूप, बुद्ध प्रतिमा, बौद्ध प्रतीक, बौद्ध मंदिर आदि उल्लेखनीय हैं। मोहम्मदगंज प्रखंड में उत्तर कोयल नदी के दाहिने तट पर अवस्थित पुरातात्विक महत्व के गांव सहार विहरा में पक्की ईंटों से निर्मित एक टीला है, जिसके अंड भाग के गर्भ में बुद्ध की विशाल प्रतिमा स्तंभ है। इसी नदी के तट पर पंसा गढ़ है, जो पुरातत्वविद डॉ एचपी सिन्हा के अनुसार बौद्ध स्तूप है। इसके अलावा हुसैनाबाद प्रखंड के महुअरी, नील कोठी, चनकार कस्तूरी तथा झरहा टोंगरा में बौद्ध स्तूप के अवशेष विद्यमान हैं।

बुद्ध की खंडित प्रतिमा की यहां पूजा : डालटनगंज से 25 किमी उत्तर पूरब पंडवा प्रखंड के छेछौरी गांव में एक विशाल बौद्ध मंदिर है, जिसकी जमीन सरकारी खतियान में बौद्ध मंदिर के नाम से प्लाट संख्या 702 में दर्ज है। अपने तल से लगभग तीस फीट ऊंचा इस मंदिर का गर्भगृह पत्थर द्वारा तथा इसका मीनार पक्की ईंटों द्वारा निर्मित है। पलामू में बुद्ध एवं बौद्ध धर्म से संबंधित प्रतिमाएं अनेक स्थानों से प्राप्त हुई है।

स्टेट म्यूजियम में रखी गई हैं कलाकृतियां : कबरा कलां में बुद्ध का चित्र उकेरित एक लौह फलक मिला है,जो स्टेट म्यूजियम रांची में प्रदर्शित है। हुसैनाबाद प्रखंड के सबानो गांव में बौद्ध देवी तारा की खंडित मूर्ति एक कुआं से मिली है। पंसा गढ़ से पत्थर की एक हाथी प्रतिमा मिली है, जो बुद्ध के जन्म का प्रतीक चिह्न है। हुसैनाबाद प्रखंड के ऊपरी कलां गांव में प्रतिमा उकेरित कलाकृति युक्त प्राचीन काल का एक प्रस्तर स्तंभ मिला है, जिसे स्थानीय लोगों ने शिव लिंग के रूप में एक मंदिर बनाकर स्थापित किया है।