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आदिवासियों को अपनी संस्कृति और प्रकृति को बचाए रखने की जरूरत : अशोक लकड़ा

आदिवासी और प्रकृति एक दूसरे का पूरक हैं। जिन जगहों में आदिवासियों का उपेक्षा हुई, वहां प्राकृतिक आपदा बढ़ता जा रहा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 10, 2018, 02:55 AM IST

आदिवासी और प्रकृति एक दूसरे का पूरक हैं। जिन जगहों में आदिवासियों का उपेक्षा हुई, वहां प्राकृतिक आपदा बढ़ता जा रहा है । यह बातें एन के एरिया सरना समिति के अध्यक्ष अशोक लकड़ा ने कही।वे गुरुवार को डकरा में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस पर लोगो संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा आदिवासी समाज भी अपने आप को प्रकृति से दूर कर रहा है जो बहुत घातक है। उन्हें अपने पूर्वजों के सभ्यता संस्कृति से सीख लेने की जरूरत है। लालचंद विश्वकर्मा ने कहा आदिवासी समाज दिन ब दिन अपनी ताकत खोता जा रहा है। जिसका कारण अशिक्षा और नशापान है। इनसे दूर रह कर ही हम तरक्की के रास्ते पर चल सकते है। भावी पीढ़ी को शिक्षित करके हम विकास के दौड़ में कदम से कदम मिलाकर चल सकते है। इसके पूर्व सरना माता की पूजा कर अच्छी फसल पैदावार होने की कामना किया। इसके पश्चात सभी लोगो ने एक साथ बैठ कर सामूहिक भोजन का आनंद लिया और मंदार के थाप पर जम कर थिरके । इस मौके पर सुकरा टाना भगत, शिवनाथ भगत, चरका पाहन, गोबरा भगत, चनकू उरांव, दीपक, बिरसा तिग्गा, पुरान, शांति, रीमा, बिंदु आदि मौजूद थे।

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