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कुड़मियों की संस्कृति आदिवासियों से भिन्न: मंजीत

कुड़मी की भाषा संस्कृति आदिवासी रीति रिवाज से भिन्न है। कुड़मी पर्व त्योहारों सरना स्थल में जाकर प्राकृति का पूजा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 14, 2018, 02:40 AM IST

कुड़मी की भाषा संस्कृति आदिवासी रीति रिवाज से भिन्न है। कुड़मी पर्व त्योहारों सरना स्थल में जाकर प्राकृति का पूजा नहीं करते। किसी के मरने पर हम उनकी आत्मा को पूजा पाठ कर अंदर बुलाते है। आजादी से पहले अपने को ऊंची जाति मानते हुए अपने को शिवजी का भक्त माना। कुड़मियों का भाषा, संस्कृति बंगालियों से मिलती-जुलती है। आदिवासी हो समाज युवा महासभा अनुमंडल अध्यक्ष मंजीत कोड़ा की अध्यक्षता में बाजार परिसर में हुई बैठक में महासचिव सोमा कोड़ा ने कहा कि कुड़मी महतो 1913 में एबोर्जिनिल ट्राईबस में शामिल था। 1929 को मुजफ्परपुर में संपन्न अखिल भारतीय कुड़मी क्षत्रिय महासभा में छोटानागपुर के कुड़मी महतो जाति जनप्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर कर अपने को क्षत्रिय घोषित किया था। उन्हीं की मांग पर 1950 को महामहिम राष्ट्रपति ने कुड़मी को एसटी की सूची से हटा दिया था। कहा गया कि अगर सरकार जोर जबर्दस्ती कर कुड़मी को एसटी में शामिल करती है तो आंदोलन होगा। इसके जिम्मेदार 42 विधायक होंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि अनुमंडल कार्यालय के सामने आदिवासी हो समाज युवा महासभा, कोल्हान श्रमिक संघ, जगन्नाथपुर रैयत संघर्ष समिति के बैनर तले धरना प्रदर्शन करेगा। बैठक में केंद्रीय उपाध्यक्ष भूषण लागुरी, मुखिया राई भूमिज, पंसस सोनाराम सिंकु, पंसस लंकेश्वर गागराई, प्रखंड अध्यक्ष बलराम लागुरी, बिरेंद्र बालमुचू, चंद्रमोहन सिंकु, रामेश्वर देवगम, नवीन पुरती उपस्थित थे।

बैठक करते आदिवासी हो समाज युवा महासभा के कार्यकर्ता।

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