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कहां गया विकास

देश की आजादी के 70 वर्ष बीत गए, लेकिन आज भी कई गांवों और उनके टोले विकास के मामले में मिलों दूर हैं। हालत इतनी बदतर हो...

Danik Bhaskar | Mar 05, 2018, 02:45 AM IST
देश की आजादी के 70 वर्ष बीत गए, लेकिन आज भी कई गांवों और उनके टोले विकास के मामले में मिलों दूर हैं। हालत इतनी बदतर हो गई है कि लोगों को मुलभूत सुविधाएं भी ठीक से नही मिल पा रही है। गांव के टोले तक पहुंचने के लिए रास्ते तो हैं, पर एक पक्की सड़क नही है। पानी के लिए चापाकल और कुआं भी है लेकिन वे कोई काम के नहीं हैं। बात बिजली की करें। किसी तरह गांव तक तो बिजली पहुंच गई पर, उनके छोटे छोटे टोलों के वाशिंदे आज तक ढिबरीयुग में जी रहे हैं।

रेलवे लाइन पार कर पानी लाने जाते है यहां के 40 परिवार, कभी भी हो सकती बड़ी दुर्घटना, प्रशासन का नहीं है इस टोले पर ध्यान

जगन्नाथपुर अनुमंडल से 12 किलोमीटर दूर है यह टोला

कलैईया पंचायत अंतर्गत आने वाले गांव गौड़ दिघिया का एक छोटे से टोला है मुखीसाई। यह जगन्नाथपुर अनुमंडल मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर है। सरकार सबका विकास, सबका अधिकार की बात कहती है, लेकिन मुखीसाई के करीब 40 परिवार को उनका हक व अधिकार आज भी पूरी तरह से नही मिल पा रहा है। इस टोला में सभी हरिजन समाज के लोग रहते हैं। यहां की सबसे पङी समस्या बिजली, पानी व सड़क है। इसके अलावा और भी कई समस्याएं यहां पर हैं जो सरकार, जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारियों का मुंह चिढ़ाती रही है।

क्या कहते हैं ग्रामीण मुंडा

मुखीसाई के ग्रामीण मुंडा अमित मुखी ने कहा कि गौङदिघिया में वर्षो पूर्व बिजली की सुविधा आ गई थी, लेकिन विभाग गांव के टोले को कैसे भूल गया। विद्युतीकरण के लिए मुखीसाई का सर्वे भी हुआ है, लेकिन आजतक बिजली के खंबे तक नही लगे। दो कुआं व एक चापाकल हैं, जो वर्षों से खराब व जर्जर हालत में है। पंचायत चुनाव के समय चापाकल की मरम्मत आनन फानन में हुई थी, लेकिन फिर खराब आ गई।

क्या कहते हैं नवयुवा संघ के अध्यक्ष

संजीत मुखी ने कहा ग्रामीण रेलवे लाईन पार कर अपनी जान जोखिम में डालकर रोजना करीब एक किलोमीटर दूर गौङदिघिया सहित अन्य जगहों से पानी लाते है। रेलवे लाईन के किनारे होकर एक कच्ची सङक है तो मुखीसाई तक जाती है। लेकिन वह भी जर्जर है। वर्षा के मौसम में लोगों का चलना भी मुश्किल हो जाता है। इसके आलावे और भी कई समस्या है।