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चाईबासा : आठ माह के कुपोषित बच्चे ने स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के दौरान दम तोड़ा

जिले में हर साल औसतन 6 बच्चों की कुपोषण से मौत हो रही है। मंगलवार को भी 8 माह के शिवधर केराई ने कुपोषण से दम तोड़ दिया।...

Danik Bhaskar | Feb 07, 2018, 02:50 AM IST
जिले में हर साल औसतन 6 बच्चों की कुपोषण से मौत हो रही है। मंगलवार को भी 8 माह के शिवधर केराई ने कुपोषण से दम तोड़ दिया। उसका इलाज जगन्नाथपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित एमटीसी में जारी था। स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. जगन्नाथ हेंब्रम ने मौत की वजह खून की कमी व लूज मोशन बताई है। उन्होंने बताया, पिछले तीन दिन से बच्चे को लूज मोशन हो रहे थे। शरीर में खून भी नहीं बन पा रहा था। उसे लगातार खून चढ़ाया जा रहा था। मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई। जोड़ापोखर गांव निवासी मधु व सुमी केराई का 8 माह का बेटा जन्म से ही कुपोषित था। इन दिनों उसकी हालत बिगड़ने पर स्थानीय चिकित्सकों ने 29 जनवरी को चाईबासा सदर अस्पताल के कुपोषण उपचार केंद्र में रेफर किया। एमटीसी में बच्चा ऑक्सीजन पर था। डॉ. हेंब्रम के अनुसार बच्चे को सीने में इंफेक्शन था। उसे सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी।

डॉ. जगन्नाथ कहते हैं, कुपोषित बच्चे खून की कमी, लूज मोशन व बुखार से दम तोड़ देते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को अलग वार्ड में रखकर उपचार करना अनिवार्य है, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी व्यवस्था नहीं है। दूसरी बीमारी का इलाज भी कुपोषण केंद्र में ही करना पड़ता है।

स्वास्थ्य केंद्र के कुपोषण वार्ड में भर्ती मरीज।

भास्कर न्यूज | चाईबासा

जिले में हर साल औसतन 6 बच्चों की कुपोषण से मौत हो रही है। मंगलवार को भी 8 माह के शिवधर केराई ने कुपोषण से दम तोड़ दिया। उसका इलाज जगन्नाथपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित एमटीसी में जारी था। स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. जगन्नाथ हेंब्रम ने मौत की वजह खून की कमी व लूज मोशन बताई है। उन्होंने बताया, पिछले तीन दिन से बच्चे को लूज मोशन हो रहे थे। शरीर में खून भी नहीं बन पा रहा था। उसे लगातार खून चढ़ाया जा रहा था। मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई। जोड़ापोखर गांव निवासी मधु व सुमी केराई का 8 माह का बेटा जन्म से ही कुपोषित था। इन दिनों उसकी हालत बिगड़ने पर स्थानीय चिकित्सकों ने 29 जनवरी को चाईबासा सदर अस्पताल के कुपोषण उपचार केंद्र में रेफर किया। एमटीसी में बच्चा ऑक्सीजन पर था। डॉ. हेंब्रम के अनुसार बच्चे को सीने में इंफेक्शन था। उसे सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी।

डॉ. जगन्नाथ कहते हैं, कुपोषित बच्चे खून की कमी, लूज मोशन व बुखार से दम तोड़ देते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को अलग वार्ड में रखकर उपचार करना अनिवार्य है, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी व्यवस्था नहीं है। दूसरी बीमारी का इलाज भी कुपोषण केंद्र में ही करना पड़ता है।