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अधिग्रहित भूमि के रैयतों में रोष, मांगा मुआवजा

सोमवार को सड़क चौड़ीकरण में अधिग्रहित भूमि के रैयतों को मुआवजा नहीं दिए जाने को लेकर 10 गांव के 80 ग्रामीणों ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 06, 2018, 02:50 AM IST

अधिग्रहित भूमि के रैयतों में रोष, मांगा मुआवजा
सोमवार को सड़क चौड़ीकरण में अधिग्रहित भूमि के रैयतों को मुआवजा नहीं दिए जाने को लेकर 10 गांव के 80 ग्रामीणों ने हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि मोंगरा से सूईअंबा व बरकेला तक पथ निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य शुरु होने के बावजूद सड़क चौड़ीकरण में अधिग्रहित भूमि के रैयतों को मुआवजा नहीं दिए जाने से रैयतों में रोष है। इस कारण निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। मुआवजे को लेकर रैयत समिति के अध्यक्ष मुचिया सिंकू की अध्यक्षता में 10 गांव के ग्रामीणों ने बैठक कर कुछ अहम फैसले लिए। इसमें सड़क निर्माण विभाग के अधिकारियों व सरकार के विरूद्ध नाराजगी जतायी है। उपस्थित लोगों ने कहा कि जब तक हम रैयतों को अपनी अधिग्रहित भूमि का मुआवजा नहीं मिल जाता है तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। बैठक में बिपीन हेम्ब्रम जयपाल सिंकु,बाटेराम सिंकु, नाजीर सिंकु,सोबोन लागुरी,तुरी सिंकु,माना सिंकु, दिलीप सिंकु,दुलबु सिंकु,मुरली लागुरी मौजूद थे।

मुआवजा की मांग को लेकर एसडीओ को ज्ञापन सौंपते ग्रामीण।

इन गांव के ग्रामीण बैठक में हुए शामिल - मोंगरा, ककुईता, डुमरजोवा, जोजोकोबीर, सुईअम्बा, कितांगतोण्डाग, बालियाडीह, हेस्सापी, दारूसाई।

ये फैसले लिए गए

सड़क निर्माण के पूर्व ही रैयतों को मुआवजा मिले।

80 फीट की जगह 40 फीट ही भूखंड देंगे।

सड़क चौड़ीकरण से यदि मकान क्षतिग्रस्त हो जाता है तो जमीन का चार गुना मुआवजा लेंगे।

सड़क निर्माण से बेघर परिवार को पुनर्वास की व्यवस्था सरकार करे।

यदि सड़क चौड़ीकरण से फलदार वृक्ष को नुकसान हो तो उसका भी मुआवजा दिया जाए।

जब तक भू-अर्जन हेतु सभी कागजात तैयार नहीं हो जाता है तब तक सड़क निर्माण कार्य को रोका जाए

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