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एक चिकित्सक के भरोसे जिले के 22 औषधालय

जहां एक और विश्व में विभिन्न रोगों का इलाज आयुर्वेद पद्धति की ओर करने पर जोर दिया जा रहा है। हमारे देश तो इस पद्धति...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 20, 2018, 02:55 AM IST

एक चिकित्सक के भरोसे जिले के 22 औषधालय
जहां एक और विश्व में विभिन्न रोगों का इलाज आयुर्वेद पद्धति की ओर करने पर जोर दिया जा रहा है। हमारे देश तो इस पद्धति का विश्व गुरु के रूप में जाना जाता है। लेकिन परंतु खेद इस बात का है पश्चिम सिंहभूम में 15 राजकीय आयुर्वेद औषधालय, 6 होम्योपैथिक औषधालय व एक यूनानी औषधालय के लिए महज एक चिकित्सक हैं। राजकीय आयुर्वेद औषधालयों में चाईबासा बड़ा जामदा, बलंडीया, जगन्नाथपुर, गाढ़ाहातु, तान्तनगर, बारीजोल, पूर्णिया, निश्चिंतपुर, कुइडा, गोईलकेरा, मनोहरपुर, हेस्साडीह, झींकपानी व खूंटपानी है। जबकि होम्योपैथिक औषधालयों में मंझारी, तान्तनगर, आसानपाठ, मनोहरपुर, बिंज व गुदड़ी में है। जबकि यूनानी औषधालय चाईबासा मुख्यालय में है। जिला संयुक्त औषधालय व अन्य औषधालयों में जिला चिकित्सा पदाधिकारी का पद रिक्त है जिसे प्रभार में एक मात्र जिले का चिकित्सक मनोहरपुर में डॉक्टर ओम प्रकाश को जिला चिकित्सा पदाधिकारी के प्रभार में नियुक्त किया गया है। तृतीय वर्ग के 2 पद रिक्त हैं। आयुर्वेद होम्योपैथिक एवं यूनानी में तीन पद रिक्त हैं। जबकि सेवक पद में चार की जगह चार पदस्थापित हैं। 15 राजकीय आयुर्वेद औषधालयों में गोइलकेरा एवं मनोहरपुर में चिकित्सक पदस्थापित थे और इन्हीं दो औषधालय के लिए ही दवाएं खरीदारी की गई।

दवा खरीदारी के लिए 45 हजार रुपए का आवंटन

जिले में आयुर्वेद के दो चिकित्सक थे। जिनमें से एक चिकित्सक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन दोनों चिकित्सकों को ध्यान में रखते हुए दवा खरीदारी के लिए 45 हजार रुपए का आवंटन कर दवा की खरीदारी की गई थी। जबकि आयुर्वेदिक होम्योपैथिक व यूनानी औषधालयों के लिए 80 हजार रुपए आवंटन किए गए थे। लेकिन होम्योपैथिक व यूनानी के चिकित्सक नहीं होने के कारण 80 हजार रुपए तीन भागों में बांटा गया। इसमें से आयुर्वेद के हिस्से 26 हजार रुपए आए।

वाहन की भी सुविधा नहीं

जिले में तीनों यूनिटों में निर्वेद होम्योपैथिक एवं यूनानी मिलाकर कुल 22 अध्याय हैं। लेकिन इन सभी जगहों में चिकित्सकों के जाने के लिए कोई वाहन की सुविधा नहीं है। यहां तक कि जिला चिकित्सा पदाधिकारी तक के लिए वाहन की सुविधा नहीं है। इसी से पता चलता है सरकार इन तीनों विभागों में कितना ध्यान दे रही है।

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