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करंजिया के काटेपाड़ा में जलसंकट, एक किमी दूर से पानी लाते हैं ग्रामीण

गर्मी के दस्तक देते ही पेयजल संकट गहराने लगा है। कुएं, तलाब तो क्या नदी-नाले व चापानल तक सूख रहे हैं। प्रखंड की...

Danik Bhaskar | Mar 20, 2018, 02:55 AM IST
गर्मी के दस्तक देते ही पेयजल संकट गहराने लगा है। कुएं, तलाब तो क्या नदी-नाले व चापानल तक सूख रहे हैं। प्रखंड की करंजिया पंचायत के काटेपाड़ा के लगभग 500 लोग इस जल संकट से जूझ रहे हैं। गांव के मुंडा टोला में विधायक गीता कोड़ा अपने फंड से एक सोलर सिस्टम पेयजलापूर्ति व्यवस्था की है। लेकिन जनसंख्या के हिसाब से यह नाकाफी है। सरकार द्वारा गांव के मुण्डा साई, गुटुसाई व उपरसाई तीन टोलों में कुल 7 चापानल लगाए गए हैं। उसमें से 5 चापाकल चालू अवस्था में है। लेकिन इन चापाकलों का जलस्तर भी नीचे चला गया है। ये गांव पहाड़ी क्षेत्र में बसे हैं। इस कारण करीब एक किमी दूर एक छोटा सा नाला है, जो काटेपाड़ा के ग्रामीणों का प्यास बुझा रहा है। वह भी सूखने लगा है। गांव से लगभग डेढ़ किमी दूर जायरबाड़ा नाम का एक सरकारी तालाब है, जिसके सहारे लोग हैं। मवेशी व लोगों के एक ही तलाब मे नहाने से विषाणु जनित बीमारी फैलने की आशंका है। इस तरह एक ही पानी का व्यवहार करने से बच्चों में चर्म रोग होने लगा है।

रविशचंद्र सिंकू कहते हैं कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण गांव ऊंचाई पर बसे हैं। जिससे यहां का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। चापाकल से भी पानी नहीं निकल रहा है। गुरुचरण कहते हैं कि पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। जबतक पेयजल की व्यवस्था नहीं की जाती है, तबतक स्कूल से छुट्टी कर देनी चाहिए। निराशो कुई कहती हैं कि हमें सुबह चार बजे से ही पानी की चिन्ता सताने लगती है। अहले सुबह उठ कर पानी के जुगाड़ में लगना पड़ता है। एक घड़ा पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।

क्या कहते हैं लोग

मध्य विद्यालय के बच्चे पानी के लिए परेशान

काटेपाड़ा टोला गुटुसाई स्थित मध्य विद्यालय के करीब 300 विद्यार्थी भी पेयजल संकट से परेशान हैं। यहां के रसोईया दो किमी दूर से पानी लाकर किसी तरह मध्याह्न भोजन की व्यवस्था करती हैं। लेकिन पीने व धोने के लिए उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।