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लकड़ी तस्कर गिरोह का खुलासा, 9 लोग पकड़ाए

वन विभाग ने लकड़ी तस्कर गिरोह का खुलासा किया है। इससे जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सारंडा की बेशकीमती...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:20 AM IST

वन विभाग ने लकड़ी तस्कर गिरोह का खुलासा किया है। इससे जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सारंडा की बेशकीमती लकड़ियों को सारंडा से कटवाकर पश्चिमी सिंहभूम जिले में जगह-जगह पहुंचाया जाता था। यह रैकेट ओडिशा में अपने साथियों तक भी माल की सप्लाई करता था। जंगल कटवाने के एवज में मोटी रकम की कमाई करता था।

उधर इस गिरोह के पकड़े जाने से एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त हो गया। साथ ही सारंडा के कीमती पेड़ों पर भी फिलहाल आंशिक तौर पर खतरा कम हो गया। एक साथ 9 लोगों की गिरफ्तारी को वन विभाग बड़ी कामयाबी के रूप में देख रहा है। गिरफ्तार लोगों में मो.नसीब शेख, बड़ाजामदा, गुरदीबानरा, मरांगपोंगा, उमरोज हुसैन, मझगांव, सद्दाम हुसैन, खड़पोस, इनायतुल्लाह, खड़पोस, रामकुमार दास, खड़पोस, लालू दास, खड़पोस, अजमल हुसैन, खड़पोस, अमजद अंसारी, खड़पोस शामिल हैं। इनके पास से एक बोलेरो, एक मारुती स्विफ्ट डिजायर, एक कैंपर और 50 पीस बीजा लकड़ी जब्त की गई है। पुलिस कार्रवाई में जुटी है।

दो साल में ही दरकने लगा 7 करोड़ से बना कॉलेज भवन

चाईबासा| को-ऑपरेटिव कॉलेज में करोड़ों की लागत से बना पीजी विभाग का भवन दो साल में ही दरकने लगा है। विभाग के अलग-अलग हिस्सों की दीवारों में दरार पड़ गई है। फर्श पर लगा टाइल्स भी टूटने लगा है। झारखंड छात्र मोर्चा ने घटिया निर्माण के लिए संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। माेर्चा के मो. सरफराज ने कहा- जिस प्रकार से पीजी ब्लॉक के भवन में दरार पड़ी है, उससे स्पष्ट होता है घटिया सामान का प्रयोग कर पैसा बचाया गया। यह भवन केयू व उसके कालेजों में निर्माण कार्य में हो रही कमीशनखोरी व उसकी वजह से खटिया सामग्री के प्रयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है। को-ऑपरेटिव कॉलेज के जिस पीजी ब्लॉक के दीवार में दरार पड़ी है। उसके निर्माण पर करीब 7 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

लकड़ी तस्करी के आरोप में गिरफ्तार 9 बदमाश।

ओडिशा तक फैला था नेटवर्क

इस गिरोह का नेटवर्क ओडिशा तक फैला था। सारंडा की लकड़ियों को बड़बिल, जोड़ा, क्योंझर, राउरकेला आदि शहरों तक सप्लाई की जाती थी। गिरोह के सदस्य सारंडा के पांच रास्तों से लकड़ियों की सप्लाई करते थे। इसमें से पहला रास्ता रोवाम से चाईबासा, दूसरा लिपुंगा से होते हुए जगन्नाथपुर, तीसरा सैडल के रास्ते बड़बिल, चौथा छोटानागरा से जरइकेला होते हुए राउरकेला व पांचवा थोलकोबाद, दीघा होते हुए राउरकेला है।

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